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रेलवे कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका: टेस्ट में फेल तो कटेगी सैलरी का 30%, भत्ते और पेंशन भी होंगे प्रभावित!

रेलवे में नौकरी करने वाले लोको पायलट और रनिंग स्टाफ के लिए एक नया और कड़क नियम सामने आया है, जो उनकी कमाई और भविष्य को सीधे प्रभावित कर सकता है। अब अगर कोई कर्मचारी अपने काम के दौरान बड़ी गलती करता है और बाद में मनोवैज्ञानिक टेस्ट (साइको टेस्ट) में फेल हो जाता है, तो उसकी सैलरी का 30% हिस्सा कट जाएगा। इतना ही नहीं, इस फैसले से भत्ते और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन भी घटेगी।

ये है नया नियम क्या कहता है?

रेलवे बोर्ड ने हाल ही में एक सख्त आदेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि अगर कोई रनिंग स्टाफ — जैसे लोको पायलट — ड्यूटी के दौरान SPAD (सिग्नल पास्ड ऐट डेंजर) जैसी गंभीर गलती करता है और साइको टेस्ट में पास नहीं हो पाता, तो उसे ‘गैर-रनिंग स्टाफ’ घोषित कर दिया जाएगा। इसका मतलब यह है कि उसे वह अतिरिक्त 30% रनिंग भत्ता नहीं मिलेगा, जो अब तक उसकी बेसिक सैलरी में जुड़ा था।

30% भत्ता क्यों इतना अहम है?

रेलवे के रनिंग स्टाफ की जिम्मेदारी बेहद भारी होती है, इसलिए उन्हें बेसिक सैलरी के ऊपर 30% अतिरिक्त भत्ता मिलता है। यह भत्ता उनकी पेंशन में भी जुड़ता है, जो रिटायरमेंट के बाद उनकी आमदनी का बड़ा हिस्सा होता है। अब इस नए नियम के बाद, जो कर्मचारी साइको टेस्ट में फेल होंगे, उन्हें न तो ये भत्ते मिलेंगे और न ही उनकी पेंशन में यह हिस्सा जोड़ा जाएगा। सीधे शब्दों में कहें, उनकी आमदनी और भविष्य दोनों पर बड़ा असर पड़ेगा।

इस सख्त कदम का मकसद क्या है?

रेलवे प्रशासन का कहना है कि यह कदम सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। वे चाहते हैं कि रनिंग स्टाफ अपनी जिम्मेदारी और सतर्कता से काम करें ताकि यात्रियों की जान और माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। हालांकि, कई कर्मचारी इसे कठोर फैसला मान रहे हैं और चिंतित हैं कि इससे उनकी आमदनी और भविष्य सुरक्षित नहीं रहेगा।

क्या आपको लगता है यह नया नियम कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए सही है, या इससे उनकी मजबूरी बढ़ेगी? आपकी राय जानना दिलचस्प होगा!

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