जब “के मार्ट” पहुंचे मुख्यमंत्री — आम ग्राहकों के बीच एक आम इंसान की तरह

रायपुर के सरोना स्थित शुभम “के मार्ट” में उस वक्त अलग ही माहौल था, जब रोजमर्रा का सामान खरीद रहे लोगों ने देखा कि राज्य के मुख्यमंत्री खुद उनके बीच मौजूद हैं। न कोई तामझाम, न लाव-लश्कर—बस सीधे जनता के बीच, जीएसटी बचत का असर जानने खुद पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने 1,645 रुपये का घरेलू सामान खरीदा, यूपीआई से पेमेंट किया और ग्राहकों से बातचीत कर यह जाना कि क्या उन्हें जीएसटी में हुई कटौती का लाभ मिल रहा है। माहौल आत्मीय था, बातचीत सहज। गृहणियों से बजट पर असर की बात हुई, युवाओं और बुजुर्गों से दिनचर्या की चर्चा।
लोगों ने बताया—बचत हो रही है, फर्क दिख रहा है
ग्राहकों ने खुलकर कहा कि दवाइयाँ, राशन और स्टेशनरी जैसे जरूरी सामान अब सस्ते हो गए हैं। एक ग्राहक बोले—“पहले 30 दिन का राशन जितने में आता था, अब उसी में 40 दिन का आ जाता है।” मुख्यमंत्री मुस्कुरा कर बोले—“यही तो असली मकसद है, सुधार की गूंज हर घर तक पहुँचे।”
स्टेशनरी पर टैक्स अब जीरो—शिक्षा के बजट में राहत
अवंती विहार निवासी लद्दाराम ने नोटबुक दिखाते हुए बताया कि पहले उस पर 12% टैक्स लगता था, अब शून्य हो गया है। “बच्चों की स्टेशनरी पर सालाना करीब 240 रुपये की बचत हो रही है,” उन्होंने खुशी जताई।
चार चीजें लेने आए, खरीद लिया चार गुना सामान
एक ग्राहक मुरलीधर ने बताया, “मैं चार ज़रूरी चीज़ें लेने आया था, लेकिन दाम देखकर चार गुना सामान खरीद लिया।” जीएसटी कटौती ने रोजमर्रा की चीज़ों को काफी हद तक सस्ता बना दिया है।
बजट में 10% की राहत—खुश गृहिणियाँ
चंगोराभाटा निवासी देवांगन दंपति ने बताया कि उनके मंथली बजट में 10% की बचत हो रही है। पद्मा देवांगन ने कहा—“डिटर्जेंट और मसाले अब सस्ते हो गए हैं, त्योहारी सीजन में वाकई फायदा हो रहा है।”
त्योहारों की खरीदारी अब वाकई राहत लेकर आई
नवरात्रि के लिए श्रृंगार सामग्री खरीद रहीं सविता मौर्य और अनीता साकार ने कहा—“पहली बार लगता है कि सेल सिर्फ विज्ञापन नहीं है, असल में कीमतें घटी हैं। जीएसटी कटौती से ज्यादा सामान खरीद पाए हैं।”
“बचत क्रांति”—न कि सिर्फ टैक्स में कटौती
रिटायर्ड एयरफोर्स अफसर टी. पी. सिंह बोले—“जीएसटी सुधार एक ऐतिहासिक ‘बचत क्रांति’ है। यह फैसला केवल मोदी जी जैसा नेतृत्व ही ले सकता है।”




