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हादी की मौत से भड़की आग: बांग्लादेश में दंगे, अल्पसंख्यकों पर हमले और साजिश की परतें खुलीं

कट्टर भारत-विरोधी नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत की खबर ने गुरुवार रात बांग्लादेश को हिंसा की आग में झोंक दिया। सिंगापुर में इलाज के दौरान हादी के निधन की सूचना फैलते ही कई शहरों में उग्र विरोध-प्रदर्शन शुरू हुए, जो देखते ही देखते आगजनी और दंगों में तब्दील हो गए। राजधानी ढाका समेत अनेक इलाकों में मीडिया हाउस, सांस्कृतिक केंद्र और सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाया गया। हालात तब और बिगड़े जब उपद्रवियों ने बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान के आवास पर हमला कर उसे आग के हवाले कर दिया।

हिंसा का सबसे भयावह चेहरा अल्पसंख्यकों के खिलाफ सामने आया। एक हिंदू व्यक्ति को ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला। आरोप है कि हत्या के बाद शव को चौराहे पर लटकाकर जला दिया गया। इस घटना ने देश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दरअसल, 12 दिसंबर को ढाका में बाइक सवार नकाबपोश हमलावरों ने शरीफ उस्मान हादी पर गोलियां बरसाई थीं। गंभीर हालत में उन्हें मोहम्मद यूनुस प्रशासन की निगरानी में एयर एम्बुलेंस से सिंगापुर भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हादी के निधन की पुष्टि होते ही हालात तेजी से बेकाबू होते चले गए।

जांच में मुख्य आरोपी के तौर पर फैसल करीम का नाम सामने आया है। बताया जा रहा है कि गोलीबारी से एक रात पहले उसने अपनी करीबी सहयोगी मारिया अख्तर लीमा से कहा था कि “कुछ ऐसा होने वाला है जो पूरे बांग्लादेश को हिला देगा।” यह बातचीत ढाका के बाहरी इलाके सावर स्थित एक रिजॉर्ट में हुई थी। स्थानीय मीडिया के अनुसार, फैसल ने उसे हादी का एक वीडियो भी दिखाया था, जिसे जांच एजेंसियां बड़ी और संगठित साजिश का संकेत मान रही हैं।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि हमला पूरी तरह सुनियोजित था और एक पूर्व काउंसलर को इसका मास्टरमाइंड माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, कम से कम 20 लोग फंडिंग, हथियारों की व्यवस्था, हमले की प्लानिंग और आरोपियों को सुरक्षित निकालने में शामिल थे। रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब तक नौ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। छापेमारी में हथियार, गोलियां, मैगजीन और करोड़ों टका के चेक बरामद किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि हमले में इस्तेमाल बाइक पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थी, जिसे बाद में बदल दिया गया।

हालांकि, कई गिरफ्तारियों के बावजूद मुख्य शूटर फैसल करीम और उसका एक साथी अब भी फरार है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उनके भारत भागने के दावे किए गए हैं, लेकिन ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अंतरिम प्रशासन ने भारत से सहयोग की अपील करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी में मदद मांगी है। फरवरी 2026 में प्रस्तावित चुनावों से पहले यह हिंसा और साजिश बांग्लादेश को अराजकता की ओर धकेलती नजर आ रही है, जहां कानून-व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता दोनों संकट में हैं।

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