कथा से करोड़ों तक: कुबेरेश्वर धाम बना आस्था के साथ रियल एस्टेट का नया हॉटस्पॉट

सीहोर जिले का कुबेरेश्वर धाम अब सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था से उपजी आर्थिक क्रांति की मिसाल बन चुका है। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की शिवमहापुराण कथा ने जिस तरह देशभर के श्रद्धालुओं को जोड़ा, उसका असर जमीन से लेकर रोजगार तक साफ दिखाई दे रहा है।
करीब 11 साल पहले जहां इस क्षेत्र में जमीन के दाम 10 लाख रुपये प्रति एकड़ हुआ करते थे, वहीं आज वही जमीन करोड़ों में बिक रही है। कोरोना काल में ऑनलाइन और प्रत्यक्ष कथाओं से कुबेरेश्वर धाम की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बनी और देखते ही देखते यह इलाका निवेशकों और कारोबारियों की पहली पसंद बन गया।
आज हालात यह हैं कि धाम के आसपास प्राइम लोकेशन की जमीन 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ में भी मुश्किल से मिल रही है। दो साल पहले तक 15 लाख में मिलने वाली जमीनों ने रफ्तार पकड़ते हुए आसमान छू लिया है। सिर्फ धाम के पास ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों में भी जमीन की कीमतें 4 से 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच चुकी हैं।
धाम की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए 2023 में ‘चितावलिया हेमा’ गांव को जिला प्रशासन ने विशिष्ट गांव की सूची में शामिल किया। श्रद्धालुओं की आमद ने सीहोर शहर के साथ नापली, गुड़भेला और अमलाहा जैसे गांवों की तस्वीर बदल दी। जहां पहले गिने-चुने होटल थे, वहीं अब सैकड़ों होटल, होमस्टे और धर्मशालाएं खड़ी हो चुकी हैं।
आस्था ने स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के नए द्वार भी खोले हैं। धाम परिसर में सैकड़ों लोग तिलक, पूजा-सामग्री और अन्य सेवाओं से अपनी आजीविका चला रहे हैं। आम दिनों में ही हजार से डेढ़ हजार रुपये की कमाई हो जाती है, जबकि बड़े आयोजनों में यह आय कई गुना बढ़ जाती है।
अब 14 से 20 जनवरी तक होने वाला रुद्राक्ष महोत्सव कुबेरेश्वर धाम को एक बार फिर सुर्खियों में लाने को तैयार है। अनुमान है कि इस दौरान 10 से 12 लाख श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे, जिससे आस्था के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी।


