डिजिटल टोकन से आसान हुई धान बिक्री, सरगुजा के किसानों में बढ़ा भरोसा

सरगुजा जिले में धान उपार्जन की सुव्यवस्थित और पारदर्शी व्यवस्था ने किसानों की तस्वीर बदल दी है। अब खेती सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि भरोसे का सौदा बनती जा रही है। उपार्जन केंद्रों पर सरल प्रक्रिया और डिजिटल सुविधाओं के चलते किसान न केवल सशक्त हो रहे हैं, बल्कि खेती के प्रति उनका उत्साह भी नई ऊंचाइयों पर है।
ग्राम केराकछार के किसान ज्योति प्रकाश बताते हैं कि उनके पिता गोसई के नाम पर 32 क्विंटल धान का रकबा दर्ज है। पहले टोकन के लिए समितियों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब ‘किसान तुहंर टोकन’ मोबाइल ऐप ने यह झंझट खत्म कर दिया है। घर बैठे मोबाइल से ही 32 क्विंटल धान के लिए टोकन मिल गया और किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।
धान विक्रय के लिए जब वे मेंड्रा कला उपार्जन केंद्र पहुंचे तो वहां व्यवस्थाएं देखकर संतोष हुआ। गेट पास, नमी परीक्षण और बारदाना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेजी से पूरी हुई। केंद्र पर पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी मौजूद थीं, जिससे किसानों को राहत मिली।
किसानों का कहना है कि 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी और प्रति एकड़ 21 क्विंटल की सीमा तय होने से उन्हें बेहतर मुनाफा मिल रहा है। ज्योति प्रकाश बताते हैं कि धान बिक्री से मिली राशि से वे अब गेहूं, तिलहन और सब्जी की खेती का दायरा बढ़ा रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी लगातार बढ़ रही है।
किसानों ने शासन की नीतियों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि आज उन्हें अपनी उपज का सही मूल्य मिल रहा है और वे आर्थिक रूप से पहले से कहीं अधिक मजबूत महसूस कर रहे हैं।



