कश्मीर पर पाकिस्तान को एक और झटका, कजाकिस्तान ने नहीं दिया समर्थन

कश्मीर मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन जुटाने की पाकिस्तान की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। इस बार मध्य एशिया के प्रभावशाली मुस्लिम देश कजाकिस्तान ने पाकिस्तान के दावों से दूरी बनाते हुए भारत के रुख के अनुरूप रुख अपनाया है।
पाकिस्तान ने कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम जोमार्ट टोकायेव की इस्लामाबाद यात्रा के बाद एक कथित संयुक्त बयान जारी कर दावा किया था कि कजाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर उसका समर्थन किया है। हालांकि जब इस दावे की जांच हुई तो सच्चाई कुछ और ही निकली। कजाकिस्तान की ओर से जारी किसी भी आधिकारिक बयान या दस्तावेज में जम्मू-कश्मीर का कोई उल्लेख नहीं पाया गया।
यहां तक कि कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट ‘अकोर्डा’ और सरकारी समाचार एजेंसी की रिपोर्टों में भी कश्मीर मुद्दे का जिक्र नदारद है। कजाकिस्तान की ओर से जारी सूचनाओं में मुख्य रूप से आर्थिक सहयोग, कनेक्टिविटी परियोजनाओं और वाणिज्यिक समझौतों पर ही फोकस रहा।
कूटनीतिक हलकों में पाकिस्तान की इस रणनीति की आलोचना हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश की, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
वहीं, कजाकिस्तान की चुप्पी को भारत के पक्ष में एक मजबूत संकेत माना जा रहा है। भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता आया है कि जम्मू-कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं हो सकती। कजाकिस्तान का रुख यह भी दर्शाता है कि वह राजनीतिक विवादों के बजाय आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को प्राथमिकता दे रहा है।




