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सुप्रीम कोर्ट ने छात्र को टीचर मीम के लिए परीक्षा से रोकना निराधार बताया, देश भर में विवाद शुरू

एक 10वीं कक्षा के छात्र ने अपने शिक्षक का मीम सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसके बाद उसे परीक्षा देने से रोक दिया गया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और कोर्ट ने छात्र के पक्ष में फ़ैसला सुनाया, यह कहते हुए कि “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” को हर हाल में संरक्षित किया जाना चाहिए।

मामले ने तत्काल ही देश भर में विवाद खड़ा कर दिया है। शैक्षिक विशेषज्ञ और अभिभावक समूहों ने कहा कि अगर छात्र की अभिव्यक्ति पर इतनी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है, तो यह “शिक्षा प्रणाली में डर और सेंसरशिप का डर उत्पन्न कर सकता है।” विरोधी विचारधारा वाले विद्वानों का कहना है कि स्कूलों में सामाजिक मीडिया के लिए नियम आवश्यक हैं, लेकिन छात्रों की अभिव्यक्ति को गंभीरता से दंडित करना “अतिशयोक्ति” है।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि छात्र को तत्काल परीक्षा देने की अनुमति दी जाए, साथ ही शिक्षा संस्थानों को निर्देश दिया गया कि वे छात्रों के मूल अधिकारों का सम्मान करें। इस फैसले के बाद कई सामाजिक संगठनों ने “#StudentRights” और “#FreedomOfExpression” की वकालत की है।

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