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महतारी वंदन योजना बनी महिलाओं की ताकत, आर्थिक मदद से आत्मनिर्भरता की नई कहानी

रायपुर। किसी भी राज्य या समाज की असली तरक्की तभी मानी जाती है, जब वहां की महिलाएं आत्मनिर्भर, सशक्त और सम्मानजनक जीवन जीने लगें। छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना इसी सोच को मजबूत करने वाली एक अहम पहल बनकर सामने आई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में यह योजना लाखों महिलाओं के जीवन में आर्थिक मजबूती, आत्मविश्वास और नई उम्मीदें भर रही है।

यह योजना केवल हर महीने मिलने वाली 1000 रुपये की सहायता नहीं है, बल्कि महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने, परिवार में भागीदारी बढ़ाने और छोटे-छोटे सपनों को पूरा करने का अवसर भी दे रही है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ऐसी कई प्रेरक कहानियां सामने आई हैं, जो बताती हैं कि नियमित आर्थिक सहयोग किस तरह बड़े सामाजिक बदलाव की नींव बन सकता है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बस्तर में आयोजित महतारी वंदन कार्यक्रम में कई महिलाओं ने वर्चुअल संवाद के जरिए अपने अनुभव साझा किए। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के ग्राम खोडरी की अनीता साहू ने बताया कि आर्थिक परेशानियों के बीच योजना से मिली राशि से उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और “अनीता सिलाई सेंटर” की शुरुआत की। अब वे सिलाई, खेती और मजदूरी के सहारे अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं और आत्मनिर्भर जीवन की मिसाल बन गई हैं।

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले की मिथलेश चतुर्वेदी ने बताया कि पति के निधन के बाद परिवार चलाने की जिम्मेदारी अकेले उन पर आ गई थी। ऐसे समय में योजना की राशि ने उन्हें सहारा दिया। उन्होंने ई-रिक्शा खरीदा और आज मेहनत के दम पर परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। उनकी कहानी संघर्ष, साहस और स्वाभिमान का उदाहरण बन गई है।

कोरिया जिले के ग्राम डुमरिया की बाबी राजवाड़े के लिए यह राशि खेती-किसानी में मददगार साबित हो रही है। बीज, खाद और दूसरी कृषि जरूरतों को पूरा करना अब आसान हो गया है। वहीं आमापारा की सुंदरी पैकरा इस सहायता राशि से अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रही हैं, जिससे उनके परिवार के भविष्य को नई दिशा मिल रही है।

भरतपुर विकासखंड के ग्राम चांटी की सविता सिंह ने योजना की राशि बचाकर सिलाई मशीन खरीदी और गांव में सिलाई कार्य शुरू किया। अब वे नियमित आय अर्जित कर रही हैं और बच्चों की पढ़ाई का खर्च खुद उठा रही हैं। उनकी सफलता ने आसपास की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया है।

महतारी वंदन योजना का असर प्रदेशभर में साफ दिखाई दे रहा है। करीब 69 लाख विवाहित महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये की सहायता सीधे बैंक खातों में दी जा रही है। अब तक 25 किस्तों के जरिए 16 हजार 237 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी माध्यम से जारी की जा चुकी है। यह सहायता महिलाओं के जीवन में स्थिरता, भरोसा और आत्मसम्मान को मजबूत कर रही है।

इस योजना की खास बात यह है कि यह केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखा रही है। महिलाएं इस राशि से छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं, खेती को मजबूत बना रही हैं, बच्चों की शिक्षा पर खर्च कर रही हैं और परिवार की जिम्मेदारियों में मजबूती से भागीदारी निभा रही हैं।

आज महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत आधारशिला बन चुकी है। यह योजना महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ-साथ उन्हें सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी दे रही है। आने वाले समय में यह पहल प्रदेश के समग्र विकास में और बड़ी भूमिका निभाती नजर आएगी।

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