जनगणना का डिजिटल प्रयोग या डेटा पर खतरा? घर-घर सर्वे से उठे सवाल

मध्यप्रदेश समेत देश के कई राज्यों में 2027 की जनगणना के पहले चरण की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें डिजिटल हाउस लिस्टिंग और सर्वे शामिल है। इस प्रक्रिया के तहत अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा इकट्ठा किया जा रहा है।
यह पहली बार है जब इतनी बड़ी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल तरीके से की जा रही है। सरकार का कहना है कि इससे डेटा संग्रहण अधिक सटीक और तेज होगा। हालांकि, इस कदम ने डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर बहस भी छेड़ दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह अभियान पांच राज्यों में शुरू किया गया है, जिनमें मध्यप्रदेश भी शामिल है। इसके तहत नागरिकों से व्यक्तिगत और आवासीय जानकारी ली जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सिस्टम जहां सुविधा देता है, वहीं डेटा लीक और दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ाता है। हालांकि सरकार ने आश्वासन दिया है कि यह डेटा केवल नीति निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
यह पहल भविष्य के लिए एक बड़ा बदलाव हो सकती है, लेकिन इसके साथ जुड़ी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।




