मुख्य चुनाव आयुक्त की बर्खास्तगी पर विपक्ष का हमला और सरकार का करारा जवाब

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने मोर्चो खोलते हुए उनके इस्तीफे और संसद में बर्खास्तगी प्रस्ताव की मांग की है। चुनाव सूची संशोधन प्रक्रिया (SIR) में अनियमितता के मनगढ़ंत आरोपों को हथियार बनाकर संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की साजिश रची जा रही है। लेकिन भारत का लोकतांत्रिक ढांचा इतना कमजोर नहीं है कि राजनीति से प्रेरित किसी भी दबाव के आगे झुक जाए।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर लग रहे राजनीतिक आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। भारत का निर्वाचन आयोग विश्व का सबसे पारदर्शी और सशक्त संस्थान है, जिसकी साख पर पूरी दुनिया भरोसा करती है। विपक्ष अपनी चुनावी विफलताओं का ठीकरा बार-बार संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़कर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहा है। सरकार और देश का कानून यह पूरी तरह स्पष्ट कर चुका है कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी को राजनीतिक दबावरूपी धमकियों से डिगाया नहीं जा सकता।
भारत का मजबूत पक्ष यह है कि देश का लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया पूरी दुनिया में बेमिसाल है। 140 करोड़ भारतीयों के जनमत को कमजोर करने की कोई भी कोशिश कभी सफल नहीं हो सकती। संवैधानिक निष्पक्षता के खिलाफ खड़ा हर कुप्रयास भारत की न्याय व्यवस्था और जन-आकांक्षाओं के सामने धराशायी होगा।
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