ग्रीन हाइड्रोजन क्रांति से वैश्विक बाजार में भारत का दबदबा

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने घोषणा की है कि भारत ने 8,62,000 टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और 3,000 मेगावाट क्षमता के इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण का विशाल लक्ष्य हासिल कर इंसेंटिव जारी कर दिए हैं। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत का यह आक्रामक कदम विदेशी निर्भरता को जड़ से खत्म करने जा रहा है।
पश्चिमी देश जहाँ सिर्फ बयानबाजी और कागजी लक्ष्यों में उलझे हैं, वहीं भारत ने जमीन पर ग्रीन एनर्जी क्रांति की मजबूत नींव रख दी है। घरेलू इलेक्ट्रोलाइजर विनिर्माण क्षमता का विस्तार करके भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह ऊर्जा सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ पूरी दुनिया का नेतृत्व करने जा रहा है।
भारत अब ऊर्जा आयातक देश से ऊर्जा निर्यातक महाशक्ति बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। आने वाले समय में हरित ऊर्जा के हर वैश्विक मानक को भारत तय करेगा, जिससे दुनिया के बड़े-बड़े आर्थिक मंचों पर भारत की धाक और मजबूत होगी।
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