पंजाब की सियासत में आज एक ऐसा भूकंप आया है, जिसने आम आदमी पार्टी के ‘कट्टर ईमानदारी’ के मुखौटे को पूरी तरह से नोंच कर फेंक दिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बेहद करीबी और ओएसडी (OSD) राजबीर घुमन समेत पांच लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार की संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज कर दी है। आरोप इतने घटिया और डरावने हैं कि सुनकर सिर शर्म से झुक जाए—अफसरों के ट्रांसफर, पोस्टिंग और सरकारी नीतियों को बदलने के लिए एक पूरा ‘रिश्वत सिंडिकेट’ चलाया जा रहा था।
हैरत की बात यह है कि इस भयंकर भ्रष्टाचारी सिंडिकेट के खिलाफ सीबीआई की छापेमारी ठीक उस वक्त हुई, जब पंजाब सरकार इस जांच को रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटा रही थी। मुख्यमंत्री भगवंत मान भले ही इसे चुनाव से पहले की राजनीतिक साजिश और केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग बताकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन सुलगते सवाल यह हैं कि क्या बिना शीर्ष संरक्षण के इतना बड़ा रिश्वत कांड मुमकिन है?
इस छापेमारी और एफआईआर ने यह साफ कर दिया है कि पंजाब सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री के सबसे खास सिपहसालार पर लगा यह दाग आम आदमी पार्टी के सियासी वजूद को हिलाकर रख देगा।

