श की राजधानी दिल्ली की सड़कें आज उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गईं जब जंतर-मंतर पर बवाल काटने पहुंचे कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को दिल्ली पुलिस ने बर्बरता से घसीटकर हिरासत में ले लिया। इस भयंकर ड्रामे और तानाशाही रवैये को देखकर पूरा देश सन्न है। जंतर-मंतर पर विपक्षी सांसदों का हुजूम मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोलने निकला था, लेकिन पुलिसिया लाठियों और फौजी छावनी ने उनकी आवाज को कुचल कर रख दिया।
विपक्ष का सीधा आरोप है कि यह मोदी सरकार और चुनाव आयोग के गुप्त गठजोड़ का सबसे घिनौना चेहरा है। जब प्रियंका गांधी ने चिल्लाकर कहा कि ‘देश सब देख रहा है’, तो पुलिस ने बिना कोई सुराग दिए राहुल गांधी को बस में ठूंस दिया। इस आक्रामक और तानाशाही पुलिसिया एक्शन ने भारतीय राजनीति के इतिहास में एक और काला अध्याय लिख दिया है। क्या अब इस देश में शांतिपूर्ण मार्च करना भी देशद्रोह हो गया है? सत्ता की हनक इस कदर हावी है कि विपक्ष के नेताओं को कीड़े-मकौड़ों की तरह सड़कों से उठाया जा रहा है।
आने वाले दिन इस सियासी आग को और भड़काएंगे क्योंकि कांग्रेस और पूरा इंडिया गठबंधन इस अपमान को भूलने वाला नहीं है। यह गिरफ्तारी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सीधे-सीधे हत्या है, जिसका जवाब देश की जनता आने वाले चुनावों में देगी।

