अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उस वक्त भूचाल आ गया जब अमेरिका ने रूस के साथ अपनी पुरानी नीतियों को दरकिनार करते हुए अप्रैल 2027 तक रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों को आधिकारिक रूप से हटा लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस अचानक और आक्रामक फैसले के मुताबिक, रूस तुरंत प्रभाव से वैश्विक बाजारों में लाखों टन डीजल की आपूर्ति करेगा। इस चौंकाने वाले कदम ने पूरी पश्चिमी दुनिया में खलबली मचा दी है, क्योंकि एक तरफ अमेरिका रूस पर शिकंजा कसने की बात करता था, वहीं दूसरी तरफ इस बड़ी आर्थिक डील ने सबको हैरान कर दिया है।
इस नाटकीय समझौते के सामने आते ही यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की भड़क उठे। उन्होंने इस डील को खुलेआम “कमजोर” और “शर्मनाक” करार देते हुए ट्रंप प्रशासन की कड़ी आलोचना की है। ज़ेलेंस्की का साफ कहना है कि युद्ध के इस दौर में रूस के साथ इस तरह के समझौते करना मॉस्को के हौसला अफजाई करने जैसा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते वैश्विक ईंधन संकट के बीच अमेरिका का यह दांव भले ही घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए हो, लेकिन इससे नाटो देशों के बीच भारी वैचारिक और कूटनीतिक दरार पैदा हो गई है।
यह साफ है कि अमेरिका और रूस के बीच की यह पर्दे के पीछे की नजदीकियां आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति का नक्शा बदल देंगी। एक तरफ जहां व्हाइट हाउस अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कड़े फैसलों को सही ठहरा रहा है, वहीं यूक्रेन इसे अपने साथ हुआ सबसे बड़ा विश्वासघात मान रहा है। इस तीखे टकराव ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नए और खतरनाक विवाद को जन्म दे दिया है।
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