भारत-अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में नया मोड़, शुल्क घटेंगे और बाजार होंगे और व्यापक

भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार को नई दिशा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शनिवार को दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने की घोषणा की। इस समझौते के तहत अमेरिका, भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले जवाबी शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा, जिससे भारतीय निर्यात को बड़ी राहत मिलेगी।
संयुक्त बयान के मुताबिक, भारत अमेरिका के कई औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर शुल्क को पूरी तरह समाप्त करेगा या उसमें उल्लेखनीय कमी करेगा। इनमें सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब व स्पिरिट जैसे उत्पाद शामिल हैं।
भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से करीब 500 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के सामान खरीदने का इरादा जताया है। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके कल-पुर्जे, बहुमूल्य धातुएं, अत्याधुनिक तकनीकी उत्पाद और कोकिंग कोयला प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इस समझौते से भारतीय निर्यातकों, खासकर एमएसएमई, किसानों और मछुआरों को लगभग 30,000 अरब अमेरिकी डॉलर के विशाल बाजार तक पहुंच मिलने की उम्मीद है। इससे वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, रबर, जैविक रसायन, हस्तशिल्प, घरेलू सजावट और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में निर्यात के नए अवसर खुलेंगे।
जेनेरिक दवाइयों, रत्न एवं आभूषण और विमान के कल-पुर्जों पर शुल्क शून्य होने से भारतीय उद्योग को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही, महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
हालांकि, भारत ने अपने संवेदनशील कृषि और दुग्ध क्षेत्रों—जैसे मक्का, गेहूं, चावल, सोया, दूध, पनीर, मुर्गी पालन, एथनॉल, तंबाकू और कुछ सब्जियों व मांस उत्पादों—को पूरी तरह संरक्षित रखने का निर्णय लिया है।
दोनों देश गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, डिजिटल व्यापार में रुकावटें खत्म करने और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए हैं। इसके साथ ही, इस अंतरिम समझौते को जल्द लागू कर एक व्यापक और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम किया जाएगा।




