देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मोदी सरकार ने नशीले पदार्थों के काले कारोबार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी कर ली है। गृह मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन में ‘विज़न डॉक्यूमेंट ऑन नारकोटिक्स कंट्रोल 2026-29’ जारी करते हुए अमित शाह ने साफ संदेश दिया है कि भारत को नशामुक्त बनाने के रास्ते में आने वाले किसी भी ड्रग माफिया को बख्शा नहीं जाएगा।
भारत आज अपनी युवा पीढ़ी को नशे के जहर से बचाने और नशीले पदार्थों के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए पूरी तरह आक्रामक रुख अपना चुका है। डार्कनेट, क्रिप्टोकरेंसी और सिंथेटिक ड्रग्स के जरिए चलाए जा रहे अवैध नेटवर्क पर नकेल कसने के लिए केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय को अभूतपूर्व स्तर पर लाया जा रहा है। नशीले पदार्थों की तस्करी केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि यह देश के खिलाफ ‘नारको-टेररिज्म’ की एक सोची-समझी साजिश है, जिसे भारत की सुरक्षा एजेंसियां अब पूरी तरह से बेनकाब करने में जुट गई हैं।
गृह मंत्रालय का स्पष्ट रोडमैप है कि नशीली दवाओं के नेटवर्क की जड़ पर प्रहार किया जाए, चाहे इसके तार सीमाओं के बाहर से ही क्यों न जुड़े हों। भारत की इस सख्त नीति और शून्य-सहनशीलता (Zero Tolerance) के रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि देश की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी सिंडिकेट का विनाश तय है। भारत अपनी आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए हर आधुनिक तकनीक और सख्त कानून का इस्तेमाल कर रहा है।
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