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बिहान योजना ने बदली किस्मत: सब्जी की खेती से जानकी धुर्वे बनीं आत्मनिर्भर, सालाना कमाई 2 लाख तक

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार मजबूत कदम उठा रहा है। इस योजना से जुड़कर महिलाएं न सिर्फ आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि अपने गांवों में बदलाव की मिसाल भी पेश कर रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी कबीरधाम जिले के ग्राम झलमला की जानकी धुर्वे की है।

जानकी धुर्वे वर्ष 2013 से बिहान योजना से जुड़ी हुई हैं और “माँ शीतला स्वयं सहायता समूह” की सक्रिय सदस्य हैं। समूह के माध्यम से उन्होंने बचत की आदत डाली और जरूरत के समय आसान ऋण की सुविधा भी मिली। आजीविका शुरू करने के लिए उन्होंने समूह से एक लाख रुपये का ऋण लिया और सब्जी उत्पादन का काम शुरू किया।

उन्होंने बैंगन, पत्ता गोभी और आलू की खेती की। मेहनत, सही तकनीक और नियमित देखभाल के चलते फसल अच्छी हुई। जानकी अपनी उपज आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों के मध्यान्ह भोजन, स्थानीय बाजार और मंडी में बेचती हैं, जिससे उन्हें उचित दाम मिल जाता है।

इस प्रयास से जानकी धुर्वे हर साल करीब 1.5 से 2 लाख रुपये की आमदनी कर रही हैं। वे समय पर ऋण चुका रही हैं और परिवार की जरूरतें भी आत्मविश्वास के साथ पूरी कर पा रही हैं।

आगे वे एकीकृत फार्मिंग क्लस्टर के तहत सब्जी उत्पादन को और विस्तार देने की तैयारी में हैं। जल्द ही टमाटर और प्याज की खेती शुरू करने की योजना है, जिससे उनकी आय और बढ़ेगी। आज जानकी धुर्वे न सिर्फ अपने परिवार का सहारा बनी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनकर सामने आई हैं।

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