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भाजपा विधायक ने श्रम मंत्री अरुण साव से पूछा—केंद्र के नियम का इंतजार कब तक?

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज एक दिलचस्प और गंभीर बहस देखने को मिली, जब भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने अपनी ही पार्टी की सरकार के श्रम मंत्री अरुण साव से गिग वर्कर्स और आउटसोर्सिंग कंपनियों को लेकर तीखे सवाल पूछे।

अजय चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ में लाखों युवा गिग वर्कर्स और आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से काम कर रहे हैं, लेकिन उनके लिए कोई स्पष्ट राज्य नियम या अधिनियम मौजूद नहीं है। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 का हवाला देते हुए पूछा कि गिग वर्कर्स को संगठित श्रेणी में माना जाएगा या असंगठित श्रेणी में?

उन्होंने यह भी कहा कि श्रम विषय समवर्ती सूची में आता है, इसलिए राज्य चाहे तो अपना कानून बना सकता है। उनका तर्क था कि केंद्र सरकार के नियम बनने का इंतजार करते-करते वर्षों निकल सकते हैं, लेकिन तब तक छत्तीसगढ़ के युवा शोषण का शिकार होते रहेंगे।

चंद्राकर ने सदन में कहा कि राज्य में कितनी आउटसोर्सिंग कंपनियां काम कर रही हैं, कितने गिग वर्कर्स कार्यरत हैं, उनकी सेवा शर्तें क्या हैं—इसकी स्पष्ट जानकारी तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में गिग वर्कर्स पर अस्वाभाविक दबाव डाला जाता है, जिससे दुर्घटनाएं और गंभीर घटनाएं होती हैं।

इस पर मंत्री अरुण साव ने जवाब दिया कि भारत सरकार ने 2020 में चार श्रम संहिताएं लागू की हैं, जिनमें सामाजिक सुरक्षा संहिता भी शामिल है। हालांकि उनके नियम अभी पूर्ण रूप से अधिसूचित नहीं हुए हैं। जैसे ही केंद्र के नियम बनेंगे, छत्तीसगढ़ सरकार भी उसी के अनुरूप नियम बनाएगी और लागू करेगी।

मंत्री ने बताया कि राज्य स्तर पर एक समिति भी गठित की गई थी, लेकिन केंद्र की नई श्रम संहिताओं के लागू होने के बाद प्रक्रिया उसी दिशा में आगे बढ़ रही है।

लेकिन अजय चंद्राकर ने दो टूक कहा कि यदि अन्य राज्य अपने स्तर पर कानून बना सकते हैं तो छत्तीसगढ़ भी बना सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि विशेषज्ञों, रिटायर्ड जज या विधि विशेषज्ञों की मदद से राज्य अपना अधिनियम तैयार कर सकता है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया का विषय नहीं, बल्कि लाखों युवाओं की सुरक्षा और रोजगार का सवाल है।

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