छत्तीसगढ़ में ‘जल संचय-जन भागीदारी 2.0’ को रफ्तार, 31 मई 2026 तक 10 लाख जल संरचनाओं का लक्ष्य

रायपुर। विष्णु देव साय और सी. आर. पाटिल की संयुक्त अध्यक्षता में नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री वर्चुअल माध्यम से जुड़े। बिलासपुर, दुर्ग और सूरजपुर के कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में चल रहे जल संरक्षण कार्यों का प्रस्तुतिकरण दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संकट अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास से जुड़ी गंभीर चुनौती है। उन्होंने जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें पानी को प्रसाद समान मानकर जिम्मेदारी से उपयोग करने की बात कही गई है।
पहले चरण में छत्तीसगढ़ ने देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया था। इस दौरान बोरवेल रिचार्ज, रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, सोक पिट, रिचार्ज शाफ्ट और ओपनवेल रिचार्ज जैसी संरचनाओं का बड़े पैमाने पर निर्माण हुआ। वर्तमान में प्रदेश में 5 क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल भू-जल ब्लॉक चिन्हित हैं। 2024 की तुलना में 2025 में पांच ब्लॉकों में भू-जल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है।
दूसरे चरण में तकनीक आधारित रणनीति अपनाते हुए 31 मई 2026 तक 10 लाख जल संरक्षण संरचनाएं बनाने का लक्ष्य रखा गया है। रजत जयंती वर्ष के तहत 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले चार लाख किसानों को खेतों में डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे सिंचाई, भू-जल संवर्धन और मछली पालन को बढ़ावा मिलेगा।
अभियान के तहत सभी संरचनाओं की जियोटैगिंग, ग्राम पंचायत स्तर पर वॉटर बजट और जल सुरक्षा योजनाओं की तैयारी की जाएगी। युवाओं को “जल मित्र” के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों में 40% और क्रिटिकल ब्लॉकों में 65% कार्यों का लक्ष्य तय किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने मनरेगा के तहत उपलब्ध राशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने और जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। राजनांदगांव में एक महिला सरपंच द्वारा किए गए जल संरक्षण प्रयासों की भी सराहना की गई।
बैठक में राज्य और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा सभी जिलों के कलेक्टर वर्चुअली शामिल हुए।




