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ग्रीन इकोनॉमी में तेजी से आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़, हरित विकास पर सरकार का जोर

रायपुर। छत्तीसगढ़ को देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत इंजन बताते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य अब ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित दूसरे छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन में उन्होंने यह बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सम्मेलन का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यहां नीति निर्माता, उद्योग जगत, शिक्षाविद, शोधकर्ता और पर्यावरण विशेषज्ञ एक साथ बैठकर महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करते हैं। उन्होंने जलवायु संकट को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि अब केवल विचार नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के उपायों को व्यवहार में उतारना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि केंद्र के नेतृत्व में चल रही डबल इंजन सरकार विरासत और विकास दोनों को साथ लेकर चल रही है। भारत की परंपरा हमेशा से प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली की रही है और सरकार उसी दिशा में ठोस नीतिगत कदम उठा रही है।

मुख्यमंत्री के अनुसार छत्तीसगढ़ देश में स्टील उत्पादन का प्रमुख केंद्र है और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए ग्रीन स्टील जैसे नवाचार अपनाए जा रहे हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि संयुक्त वन एवं वृक्ष आवरण बढ़ाने में राज्य देश में पहले स्थान पर रहा है, जो सरकार की नीतियों और जनता की जागरूकता का परिणाम है।

राज्य में सोलर रूफटॉप योजना के जरिए उपभोक्ताओं को ऊर्जा उत्पादक बनाया जा रहा है, वहीं बायो-एथेनॉल क्षेत्र में भी निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं। “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के माध्यम से लोगों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए संसाधनों का उपयोग करते समय पर्यावरण का ध्यान रखना जरूरी है। ई-ऑफिस व्यवस्था लागू होने से कागज की खपत कम हुई है और संसाधनों की बचत भी हो रही है।

जनजातीय बहुल राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ का लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है। वन क्षेत्रों में पेड़ों को देवता के रूप में पूजने की परंपरा प्रकृति संरक्षण की गहरी भावना को दर्शाती है।

नई औद्योगिक नीति में हरित पहल को प्राथमिकता दी गई है और पर्यावरण अनुकूल उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान है। मुख्यमंत्री ने लोगों से पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत स्वयं से करने का आह्वान भी किया।

इस अवसर पर सम्मेलन से जुड़े शोध संकलन “एब्स्ट्रेक्ट”, चर्चाओं पर आधारित “हाइलाइट्स ऑफ द समिट” तथा जनजातीय परंपराओं पर केंद्रित पुस्तक “कथा कंथली” का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, शिक्षाविद और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

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