छत्तीसगढ़ की नई स्टार्टअप नीति को कैबिनेट की मंजूरी, 2030 तक 5 हजार से ज्यादा स्टार्टअप्स को मिलेगा सहारा

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में नवाचार और उद्यमिता को नई उड़ान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंत्रिपरिषद ने “छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30” को मंजूरी दे दी है। इस नीति का लक्ष्य राज्य में एक मजबूत, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करना है, जिससे रोजगार सृजन के साथ सतत आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
नई नीति के तहत वर्ष 2030 तक 5,000 से अधिक नए DPIIT-पंजीकृत स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने का लक्ष्य तय किया गया है। स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन, मेंटरशिप, बाजार से जोड़ने, क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और बौद्धिक संपदा संरक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
नीति में 100 करोड़ रुपये के स्टार्टअप कैपिटल फंड और 50 करोड़ रुपये के क्रेडिट रिस्क फंड का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा सीड फंड के रूप में 10 लाख रुपये तक सहायता, ब्याज अनुदान, किराया अनुदान, पेटेंट व गुणवत्ता प्रमाणन सहायता और रोजगार सृजन सब्सिडी जैसी कई अहम सुविधाएं शामिल हैं। महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति-जनजाति, दिव्यांगजन, पूर्व सैनिक, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा।
उद्योग मंत्री ने बताया कि राज्य में हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत इनक्यूबेशन इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस मेगा इनक्यूबेटर्स स्थापित होंगे, जो स्टार्टअप्स को अधोसंरचना, तकनीकी सहायता, मार्गदर्शन और निवेश से जोड़ने का काम करेंगे। साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों में स्पोक इनक्यूबेटर्स के जरिए स्थानीय नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा।
राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में कॉलेज इनोवेशन एवं स्टार्टअप सेल की स्थापना भी की जाएगी, ताकि युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित किया जा सके। यह नीति “अमृतकाल–छत्तीसगढ़ विज़न 2047” के लक्ष्यों के अनुरूप है और राज्य को नवाचार आधारित उद्यमिता का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।




