रामलला दर्शन योजना से जुड़ी छत्तीसगढ़ की सामाजिक और सांस्कृतिक सफलता

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई रामलला दर्शन योजना प्रदेश की धार्मिक आस्था के साथ-साथ इसकी सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुकी है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेशवासियों को अयोध्या में रामलला के दर्शन का अवसर प्रदान करना है। इस योजना की औपचारिक शुरुआत 5 मार्च 2024 को रायपुर से हुई थी, जब मुख्यमंत्री साय ने स्वयं पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
जशपुर जिले में इस योजना के तहत अब तक 1632 श्रद्धालुओं ने अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन किए हैं। इसमें जशपुर के विभिन्न जनपद पंचायतों और नगर पालिकाओं से लोग शामिल हैं, जैसे जशपुर, मनोरा, बगीचा, कुनकुरी, दुलदुला, फरसाबहार, पत्थलगांव, कांसाबेल और कोतबा। दर्शन के साथ-साथ श्रद्धालुओं को पूरी यात्रा का पैकेज दिया जाता है, जिसमें यात्रा, आवास, मंदिर दर्शन, भोजन और नाश्ते की भी व्यवस्था शामिल है।
छत्तीसगढ़ को राम का ननिहाल भी कहा जाता है, यहां के लोग राम को ‘भांचा राम’ के नाम से भी पुकारते हैं। राज्य के हर कोने में राम के प्रति गहरी आस्था देखने को मिलती है। अयोध्या के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं के चेहरे पर संतुष्टि और खुशी स्पष्ट झलकती है, जो इस योजना की सफलता का जीवंत प्रमाण है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उनकी सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए वे अपने अनुभव साझा करते हैं।
यह योजना प्रदेश की युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और राम के आदर्शों को समाज में पुनः स्थापित करने का प्रभावशाली माध्यम साबित हो रही है। जब ट्रेन रवाना होती है, तब भजन और जयकारों की गूंज से यात्रा का माहौल श्रद्धा और उत्साह से भर जाता है।
रामलला दर्शन योजना सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और सामाजिक सद्भावना को बढ़ावा देने वाला एक बड़ा प्रयास है। मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में इस पहल ने हजारों श्रद्धालुओं को उनके सपनों की यात्रा का अनुभव दिया है। यह योजना न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि जीवन मूल्यों में राम के आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा भी देती है।