चमक से आगे सिनेमा: रायपुर साहित्य उत्सव में सत्यजीत दुबे ने रखी सच्ची कहानियों की बात

रायपुर साहित्य उत्सव में “नई पीढ़ी की फिल्मी दुनिया” पर हुई बातचीत किसी औपचारिक चर्चा से कहीं आगे निकल गई। अभिनेता सत्यजीत दुबे ने मंच से सिनेमा को बजट और ग्लैमर की बजाय सच्चाई, संवेदना और ज़मीनी अनुभवों से जोड़कर देखा। श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में उन्होंने साफ कहा कि फिल्म की उम्र उसकी ईमानदारी तय करती है, न कि उसका खर्च।
छत्तीसगढ़ के लोकजीवन और सामाजिक अनुभवों को उन्होंने भारतीय सिनेमा की बड़ी ताकत बताया। डिजिटल दौर और ओटीटी को उन्होंने क्षेत्रीय कहानियों की नई आवाज़ कहा, जो अब सीमाओं में नहीं बंधी। उनके मुताबिक आज का दर्शक परफेक्ट चेहरे नहीं, बल्कि असली इंसान देखना चाहता है।
बिलासपुर से मुंबई तक का उनका सफर संघर्ष, थिएटर और धैर्य से बना है। ‘मुंबई डायरीज 26/11’ से लेकर अन्य वेब सीरीज तक, उन्होंने संवेदनशील अभिनय से अपनी पहचान बनाई। मंच से उन्होंने युवाओं को कोई नारा नहीं दिया, बस यह याद दिलाया कि ईमानदारी के बिना न सफलता टिकती है, न किरदार।



