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भाद्रपद की मासिक शिवरात्रि: रात्रि में गूंजेगा शिव तांडव का दिव्य नाद, मिलेगा महादेव का आशीर्वाद

भाद्रपद मास की गहराती रात... और मध्य रात्रि में महाकाल के स्तुति की गूंज!

हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाली मासिक शिवरात्रि इस बार 21 अगस्त को पड़ रही है। यह रात्रि केवल व्रत या पूजा की नहीं, महादेव के साक्षात सान्निध्य की रात्रि होती है। इस पावन अवसर पर भक्त शिवलिंग का जलाभिषेक कर, शिव तांडव स्तोत्र का पाठ कर भगवान शिव की कृपा पाने का प्रयास करते हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त:

समय: रात 12:02 बजे से लेकर 12:46 बजे तक

काल: चतुर्दशी तिथि की मध्य रात्रि – जब शिव की तांडव लय ब्रह्मांड में गुंजती है।

क्यों है मासिक शिवरात्रि विशेष?

माना जाता है कि इस दिन महादेव विशेष रूप से जाग्रत रहते हैं और जो भी भक्त भक्ति भाव से रात्रि के समय व्रत, ध्यान, और शिवतांडव स्तोत्र का पाठ करता है, उसके सभी पाप कटते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है।

शिव तांडव स्तोत्र: दिव्यता का अनुभव

इस दिन रावण द्वारा रचित ‘शिव तांडव स्तोत्र’ का पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है। यह स्तोत्र केवल वाणी नहीं, आत्मा का वह उच्छ्वास है, जिसमें शिव की शक्ति, सौंदर्य और तांडव की छवि प्रकट होती है।

शिव तांडव स्तोत्र का हर श्लोक शिव के विराट रूप का बखान करता है – जटाओं से बहती गंगा, भाल पर अग्नि, कंठ में सर्प, और रुद्र तांडव की गूंज।

“धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः ॥”

जलाभिषेक का महत्व:

मासिक शिवरात्रि पर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, और धतूरा अर्पित करना अत्यंत पुण्यकारी होता है। यह शिव की शांति व सौम्यता का आह्वान है।

व्रत का भाव: केवल उपवास नहीं, आत्मा का समर्पण

शिवरात्रि का व्रत केवल शरीर की तपस्या नहीं, आत्मा की उस पुकार का नाम है, जो कहती है –
“हे महादेव, मुझे अपने होने का अनुभव दो।”

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