डिजिटल धान खरीदी से किसानों को राहत, ‘किसान तुंहर टोकन’ बना भरोसेमंद सहारा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान उपार्जन व्यवस्था अब पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और किसान-केंद्रित हो चुकी है। राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए सुधारों का असर साफ नजर आ रहा है। ‘किसान तुंहर टोकन’ मोबाइल ऐप के जरिए किसान घर बैठे ही धान बेचने का टोकन प्राप्त कर रहे हैं, जिससे खरीदी प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान, समयबद्ध और व्यवस्थित हो गई है।
अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत करजी के लघु सीमांत किसान धर्मसाय बताते हैं कि उनके पास कुल 84 क्विंटल धान है। उन्होंने मोबाइल ऐप के माध्यम से 64 क्विंटल धान के लिए टोकन लिया। उनका कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था से समिति कार्यालयों की भीड़ और बार-बार चक्कर लगाने की परेशानी खत्म हो गई है। इससे समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है।
निर्धारित तिथि पर जब वे धान उपार्जन केंद्र पहुंचे, तो गेट पास, धान की नमी जांच और बारदाना वितरण की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के पूरी हुई। किसान धर्मसाय के अनुसार इस वर्ष धान खरीदी की व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक सुव्यवस्थित है। केंद्रों पर पेयजल, बैठने के लिए छायादार स्थान और समिति कर्मचारियों का सहयोग किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है।
राज्य सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी की जा रही है। इसका सीधा लाभ किसानों की आय में बढ़ोतरी के रूप में दिखाई दे रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। बेहतर आमदनी के चलते किसान अब गेहूं, तिलहन और सब्जी उत्पादन की ओर भी कदम बढ़ा रहे हैं, जिससे आय के नए स्रोत तैयार हो रहे हैं।
किसान धर्मसाय का कहना है कि डिजिटल पारदर्शिता, उचित मूल्य और सुविधाजनक खरीदी व्यवस्था ने किसानों में नया आत्मविश्वास पैदा किया है। इससे प्रदेश का कृषि तंत्र मजबूत हो रहा है और किसानों को भविष्य के लिए नई उम्मीद मिल रही है।




