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कोरिया की चार महिलाओं ने बदली गांव की तस्वीर, स्वच्छता अभियान से बनीं आत्मनिर्भर

रायपुर। अगर मन में दृढ़ संकल्प और समाज के लिए कुछ करने की इच्छा हो, तो बदलाव की राह खुद बन जाती है। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के बैकुंठपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बुडार में चार महिलाओं ने यह बात सच कर दिखाया है। अंजनि, हीरा मनी, लीलावती और मित्तल आज अपने गांव में स्वच्छता की मिसाल बन चुकी हैं और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।

ये चारों महिलाएं पिछले लगभग तीन वर्षों से “स्वच्छता दीदी” के रूप में गांव में स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ा रही हैं। हर सप्ताह बुधवार और शनिवार को वे घर-घर जाकर कचरा संग्रहण करती हैं और ग्रामीणों को स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूक भी करती हैं। साथ ही लोगों को गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने के लिए प्रेरित करती हैं, ताकि कचरे का सही प्रबंधन हो सके और गांव साफ-सुथरा बना रहे।

शुरुआती दौर में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई ग्रामीण कचरा अलग-अलग देने को तैयार नहीं थे और स्वच्छता को लेकर जागरूकता भी कम थी। लेकिन इन महिलाओं ने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार घर-घर जाकर लोगों को समझाया और धीरे-धीरे गांव के लोगों की सोच में बदलाव आने लगा। आज स्थिति यह है कि गांव के लगभग सभी घर नियमित रूप से कचरा अलग-अलग देकर स्वच्छता में सहयोग कर रहे हैं।

प्रशासन के सहयोग से इन महिलाओं को कबाड़ी व्यवसाय से भी जोड़ा गया, जिससे वे प्लास्टिक, कागज और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सूखे कचरे को बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। इस कार्य से प्रत्येक महिला को हर महीने करीब 2 से 3 हजार रुपये तक की आय हो रही है। अब तक चारों महिलाएं मिलकर लगभग ढाई लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त कर चुकी हैं, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है।

इनके उत्कृष्ट कार्य और लगातार प्रयासों को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा उन्हें एक ई-रिक्शा भी प्रदान किया गया है। इससे कचरा संग्रहण का कार्य और आसान हो गया है और वे अधिक प्रभावी तरीके से अपने अभियान को आगे बढ़ा रही हैं। महिलाओं ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सरकार के सहयोग से उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला है और अब वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।

आज अंजनि, हीरा मनी, लीलावती और मित्तल न केवल अपने गांव को स्वच्छ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, बल्कि यह भी साबित कर रही हैं कि सामूहिक प्रयास, एकता और लगन से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

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