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5 लाख की इनामी महिला नक्सली गीता ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, 20 साल बाद मुख्यधारा में वापसी

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में नक्सल मोर्चे पर एक बड़ी सफलता सामने आई है। लंबे समय से सक्रिय और 5 लाख रुपए की इनामी महिला नक्सली भूमिका उर्फ गीता (37) ने माओवादी संगठन से नाता तोड़ते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। वह नगरी एरिया कमेटी के अंतर्गत गोबरा एलओएस की कमांडर थी और साल 2005 से नक्सली गतिविधियों में शामिल रही।

बीजापुर जिले के गुंगालुर थाना क्षेत्र के पुसनार गांव की रहने वाली गीता ने संगठन के भीतर भेदभावपूर्ण व्यवहार और उसकी हिंसक विचारधारा से निराश होकर यह फैसला लिया। 6 जनवरी को वह स्वयं धमतरी एसपी कार्यालय पहुंची और पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

नक्सली जीवन की शुरुआत के बाद गीता ने प्रारंभिक प्रशिक्षण लेकर 2010 तक प्लाटून-01 में कार्य किया। इसके बाद उसे ओडिशा राज्य कमेटी में भेजा गया, जहां वह 2011 से 2019 तक सीसीएम संग्राम की गार्ड के रूप में तैनात रही। वर्ष 2019 से 2023 तक वह सीनापाली एरिया कमेटी में एसीएम रही और सितंबर 2023 में गोबरा एलओएस की कमांडर बनाई गई। संगठन में घटती संख्या के चलते वह नगरी और सीतानदी एरिया कमेटी के साथ संयुक्त रूप से सक्रिय थी।

गीता कई मुठभेड़ों में शामिल रही है, जिनमें ओडिशा, बीजापुर, गरियाबंद और धमतरी के जंगलों में हुई घटनाएं शामिल हैं। उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं में आपराधिक मामले दर्ज हैं।

एसपी सूरज सिंह परिहार ने बताया कि लगातार पुलिस दबाव, सिविक एक्शन कार्यक्रमों और छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर गीता ने हिंसा का रास्ता छोड़ने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण के बाद शासन की नीति के तहत उसे 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।

यह आत्मसमर्पण नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है और अन्य भटके युवाओं के लिए भी मुख्यधारा में लौटने का संदेश देता है।

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