हिमाचल बजट में केंद्र पर सीधा वार, विधानसभा में सियासत का पारा चढ़ा

21 मार्च 2026 को हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया और अपने भाषण की शुरुआत से ही राजनीतिक बहस को तेज कर दिया। भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, सुक्खू ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान बंद किए जाने से राज्य का वार्षिक बजट प्रभावित हुआ है। उन्होंने भाजपा पर यह आरोप भी लगाया कि उसने राज्य के हितों के समर्थन में अपेक्षित भूमिका नहीं निभाई। इसी बिंदु ने बजट को सिर्फ आर्थिक दस्तावेज नहीं रहने दिया, बल्कि इसे एक बड़े राजनीतिक संदेश में बदल दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह सुक्खू का चौथा बजट है और इसमें सरकार ने अपनी वित्तीय चुनौतियों को खुलकर सामने रखा। राजस्व घाटा अनुदान के मुद्दे को प्रमुखता से उठाकर सरकार ने यह संकेत दिया कि हिमाचल की आर्थिक स्थिति केवल राज्य सरकार की नीतियों से नहीं, बल्कि केंद्र-राज्य संबंधों से भी प्रभावित हो रही है। यही वजह रही कि बजट पेश होने के साथ ही सदन के भीतर और बाहर इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि बजट चर्चा आर्थिक प्रावधानों से आगे बढ़कर राजनीतिक जवाबदेही के सवाल तक पहुंच गई। विपक्ष के लिए यह सरकार पर हमला करने का मौका बन सकता है, जबकि सरकार इसे राज्य के अधिकारों और वित्तीय हिस्सेदारी के सवाल के रूप में पेश करती दिखी। भाषा की उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना साफ है कि 21 मार्च का यह बजट सत्र हिमाचल की राजनीति में केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य के रिश्तों पर नए विवाद की शुरुआत जैसा नजर आया।



