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लाल सागर की बिसात पर इजरायल की नई चाल: सोमालीलैंड को मान्यता, भू-राजनीति में हलचल

मध्य-पूर्व और हॉर्न ऑफ अफ्रीका की राजनीति में एक बड़ा मोड़ सामने आया है। इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र का पहला सदस्य देश बनते हुए रिपब्लिक ऑफ सोमालीलैंड को स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में आधिकारिक मान्यता दे दी है। यह कदम केवल एक कूटनीतिक घोषणा नहीं, बल्कि लाल सागर क्षेत्र में इजरायल की सुरक्षा और रणनीतिक गणनाओं का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस फैसले को अब्राहम समझौतों की भावना से जोड़ते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में बढ़ाया गया कदम बताया। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए सोमालीलैंड के राष्ट्रपति डॉ. अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाह को बधाई दी, शांति प्रयासों की सराहना की और उन्हें इजरायल की आधिकारिक यात्रा का निमंत्रण भी दिया।

मान्यता के साथ ही इजरायल ने सोमालीलैंड के साथ कृषि, स्वास्थ्य, तकनीक और अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की घोषणा की है। इजरायल की नजर खासतौर पर सोमालीलैंड की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति पर है, जो एडन की खाड़ी और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के करीब स्थित है। यही वह समुद्री मार्ग है, जहां यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती विद्रोही हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और इजरायल से जुड़े हितों को निशाना बनाते रहे हैं।

सोमालीलैंड वर्ष 1991 में सोमाली गृहयुद्ध के बाद एकतरफा स्वतंत्रता की घोषणा कर चुका है और तब से यह व्यावहारिक रूप से अलग प्रशासन के साथ काम कर रहा है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब भी इसे सोमालिया का हिस्सा मानता है। इससे पहले 2020 में ताइवान और जनवरी 2024 में इथियोपिया ने इसे लेकर अहम पहल की थी, जबकि ब्रिटेन, यूएई, तुर्की और केन्या जैसे देशों के साथ इसके अनौपचारिक संबंध पहले से मौजूद हैं।

इजरायल के इस कदम ने क्षेत्रीय विरोध को भी जन्म दिया है। सोमालिया, मिस्र, तुर्की और जिबूती ने संयुक्त रूप से इस फैसले की निंदा करते हुए सोमालिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन की बात दोहराई है। मिस्र ने साफ कहा है कि इजरायल की यह मान्यता अस्वीकार्य है और इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है।

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