जन औषधि सप्ताह शुरू, लेकिन सस्ते दवाओं के नाम पर राजनीति या स्वास्थ्य का सच?

रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत 1 से 7 मार्च तक ‘जन औषधि सप्ताह’ मनाने की घोषणा की गई है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सस्ते और भरोसेमंद जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा देना बताया गया है। ऑफिशियल इवेंट में स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता अभियान और पद यात्रा का आयोजन किया जाएगा।
आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार ये दवाइयां ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50-80% सस्ती होंगी, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग को राहत मिल सकती है। हालांकि, डॉक्टरों और फार्मा उद्योग के कुछ विशेषज्ञों ने प्रश्न उठाया है कि सस्ते दवाओं की गुणवत्ता पर कैसे भरोसा किया जाएगा और क्या यह योजना वास्तव में जनता की स्वास्थ्य चिंताओं को दूर करेगी या केवल एक राजनीतिक उद्धरण बनी रहेगी?
राज्य में कार्यक्रम के तहत Interactive Sessions, Special Discounts और MyGov पर Tagline Contests भी होंगे, जिससे जनता के जुड़ाव को बढ़ाने की कोशिश की गई है।
आधिकारिक स्रोत: IANS के अनुसार राज्य में पहले से कई जन औषधि केंद्र (Janaushadhi Kendras) संचालित हैं, जो 2000 से अधिक दवाइयां और 300 सर्जिकल उत्पाद उपलब्ध कराते हैं।




