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बुनकरों के लिए नई दिशा: तकनीक और सहकारिता से समृद्धि की ओर

रायपुर में आयोजित दो दिवसीय सहकार राष्ट्रीय बुनकर अधिवेशन में सहकारिता के भविष्य को लेकर खास संदेश दिए गए। सहकारिता के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को प्राथमिकता देने की बात कही गई, ताकि बुनकर समय के साथ नई तकनीकों को अपनाकर अपने उत्पादों को बाजार की बदलती मांग के अनुसार ढाल सकें।

विशेष रूप से यह बताया गया कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया है, जिसका उद्देश्य केवल सहकारिता को प्रोत्साहित करना नहीं, बल्कि इसके माध्यम से एक समृद्ध, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर विश्व का निर्माण करना है। इस दृष्टिकोण को अपनाकर ‘सहकार से समृद्धि’ की अवधारणा को हर घर और व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।

छत्तीसगढ़ में सहकारिता के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों को भी सराहा गया। यहां की पैक्स समितियों को बहुउद्देशीय बनाने के प्रयास, एम-पैक्स के तहत 2058 समितियों का आधुनिकीकरण और नई बहुउद्देशीय समितियों के गठन की प्रक्रिया, इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। मत्स्य, दुग्ध और लघु वनोपज जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति सहकारिता के विस्तार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

बुनकरी और हथकरघा के सांस्कृतिक और स्वदेशी महत्व पर भी जोर दिया गया। साथ ही यह सुझाव दिया गया कि बुनकरों को अपने उत्पादों की बिक्री और लोकप्रियता बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स की ओर बढ़ना चाहिए। समय के साथ तकनीक और डिजाइन में बदलाव न करने पर कई उत्पाद बाजार से बाहर हो जाते हैं, इसलिए नवाचार को अपनाना आवश्यक है।

अधिवेशन में सहकार भारती के पदाधिकारी भी उपस्थित थे, जिन्होंने इस दिशा में सक्रिय सहयोग का आश्वासन दिया। इस तरह के प्रयासों से बुनकर समुदाय को नए अवसर मिलेंगे और सहकारिता के माध्यम से समृद्धि की राह और मजबूत होगी।

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