
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सली समस्या के खात्मे की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 4 अप्रैल को राज्य के दौरे पर आएंगे और इसी दौरान राज्य सरकार “समर्पण नीति-2025” लॉन्च करेगी। इस नीति के तहत जो नक्सली आत्मसमर्पण करेंगे, उन्हें एक हेक्टेयर तक जमीन और उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान होगा।
सरकार की नई नीति: समर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए बड़ा अवसर
राज्य सरकार नक्सली समस्या को खत्म करने के लिए प्रभावी योजनाएं बना रही है। इसके तहत जो नक्सली हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए सरकार ने आकर्षक पैकेज तैयार किया है।
नीति के प्रमुख बिंदु
•आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को एक हेक्टेयर तक जमीन दी जाएगी।
•उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिलेगी।
•उन्हें पुनर्वास के लिए घर और आर्थिक सहायता भी मिलेगी।
•समर्पण करने वालों को हथियार के बदले धनराशि दी जाएगी।
हथियार के बदले कितनी राशि मिलेगी?
सरकार ने हथियारों के बदले दी जाने वाली धनराशि को भी तय किया है। कुछ प्रमुख हथियारों के लिए दी जाने वाली राशि इस प्रकार है:
•एलएमजी, मोर्टार, रॉकेट लॉन्चर: ₹5 लाख
•एके-47, इंसास, एसएलआर: ₹2.5 लाख
•पिस्टल और रिवॉल्वर: ₹1.5 लाख
•देशी कट्टा और अन्य छोटे हथियार: ₹1 लाख
महिलाओं को अतिरिक्त सुविधाएं
नई नीति में महिला नक्सलियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। समर्पण करने वाली महिला नक्सलियों को पुनर्वास केंद्रों में सुरक्षित रखा जाएगा और उन्हें स्वरोजगार, सिलाई, कढ़ाई जैसे कामों का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।
सरकार का उद्देश्य और रणनीति
राज्य सरकार का मानना है कि यह योजना नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी। राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम चाहते हैं कि जो नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उन्हें एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिले।”
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव लाने में मदद कर सकती है। यदि इसे सही ढंग से लागू किया गया, तो बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर सकते हैं, जिससे राज्य में शांति बहाल होने की संभावना बढ़ जाएगी।
अमित शाह की मौजूदगी में ऐलान
4 अप्रैल को जब अमित शाह छत्तीसगढ़ दौरे पर आएंगे, तभी इस नई नक्सल नीति को औपचारिक रूप से लॉन्च किया जाएगा। इसके बाद उम्मीद है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में आत्मसमर्पण की प्रक्रिया तेज हो जाएगी और सरकार अपनी पुनर्वास योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करेगी।