राहुल गांधी की 8 साल पुरानी ‘GST चेतावनी’ आज फिर आई चर्चा में, मोदी सरकार के ऐलान से हुई तुलना

जब साल 2016 में राहुल गांधी ने GST को लेकर चेतावनी दी थी कि यह गरीबों पर भारी पड़ेगा, तब बीजेपी नेताओं ने उनका जमकर मज़ाक उड़ाया था। लेकिन अब, आठ साल बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उस बात को दोहराया है — बस शब्द अलग हैं, विचार वही है।
राहुल गांधी की दूरदर्शिता या बीजेपी की पलटी?
2016 में राहुल गांधी ने ट्वीट कर GST की उच्च दरों को गरीबों पर ‘अनावश्यक बोझ’ बताया था और 18% से कम की दर तय करने की वकालत की थी। उसी वक्त उन्हें “पप्पू” और उनकी माँ सोनिया गांधी को “सोनिया टैक्स” कहकर ट्रोल किया गया था। लेकिन अब 2025 में, प्रधानमंत्री मोदी ने लालकिले से घोषणा कर दी — देश में GST की केवल दो दरें रहेंगी: 5% और 18%, और ये बदलाव दिवाली से पहले लागू होंगे।
राहुल गांधी का आरोप: GST बना गरीबों की सज़ा, अरबपतियों का इनाम
1 जुलाई 2025 को राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करके मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
“GST को ऐसा बनाया गया है कि यह गरीबों को सज़ा दे, छोटे व्यापारियों को खत्म करे और कुछ अरबपतियों को फायदा पहुँचाए।”
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले आठ साल में 18 लाख से ज़्यादा MSME बंद हो चुके हैं। आम आदमी को चाय से लेकर इंश्योरेंस तक पर टैक्स देना पड़ता है, लेकिन बड़ी कंपनियों को हर साल ₹1 लाख करोड़ की छूट मिलती है।
कांग्रेस की नई माँग: जीएसटी 2.0 लाओ, वरना आंदोलन होगा
राहुल गांधी की पोस्ट के बाद कांग्रेस पार्टी ने भी मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने केंद्र सरकार से GST 2.0 पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है, ताकि कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके।
पार्टी प्रवक्ता ने कहा
“GST लागू होने के बाद कई समस्याएं सामने आई हैं। केंद्र सरकार को चाहिए कि वह सभी राज्यों के साथ मिलकर एक समावेशी प्रणाली बनाए, अन्यथा कांग्रेस जनता के बीच जाकर बड़ा आंदोलन शुरू करेगी।”
निचोड़
जो बात 2016 में मजाक बनी, वही 2025 में सच्चाई बन गई। सवाल यह है — क्या राहुल गांधी की सोच वाकई ‘पप्पू’ जैसी थी, या वह वक्त से पहले समझ गए थे जो आज सबको समझ आ रहा है?