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भारत का बड़ा आर्थिक दांव, न्यूज़ीलैंड के साथ डील से कौन जीतेगा कौन हारेगा

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच 27 अप्रैल 2026 को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं, जिसकी घोषणा 24 अप्रैल को न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने की। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को अगले पांच वर्षों में दोगुना कर 5 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखता है।

यह समझौता 22 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई द्विपक्षीय वार्ताओं के बाद संभव हुआ है। इसके तहत व्यापारिक बाधाओं को कम करने और निवेश के अवसरों को बढ़ाने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कृषि, डेयरी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

हालांकि, इस समझौते को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आ रही हैं। खासतौर पर भारतीय किसानों और छोटे उद्योगों पर इसके असर को लेकर बहस शुरू हो गई है। कई जानकारों का कहना है कि विदेशी उत्पादों की एंट्री से घरेलू बाजार प्रभावित हो सकता है।

सरकार का दावा है कि यह समझौता भारत के निर्यात को बढ़ावा देगा और नई नौकरियों के अवसर पैदा करेगा। वहीं आलोचक इसे जोखिम भरा कदम बता रहे हैं।

यह डील ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे इसका असर और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

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