छत्तीसगढ़ में खनिज विकास की नई रफ्तार: CMDC से बढ़ा राजस्व, रोजगार और आत्मनिर्भरता का रास्ता

रायपुर। छत्तीसगढ़ खनिज संपदा के सुनियोजित विकास की दिशा में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। राज्य में खनन, अन्वेषण और खनिज विपणन को गति देने के उद्देश्य से गठित छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CMDC) आज खनिज आधारित अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन चुका है। वर्ष 2001 में गठन के बाद से CMDC ने खनन, मार्केटिंग, एमडीओ मॉडल, संयुक्त उपक्रम और अन्वेषण के माध्यम से कार्य करते हुए राज्य को उल्लेखनीय राजस्व दिलाया है।
वर्तमान में CMDC टिन, बॉक्साइट, लौह अयस्क, कॉपर, हीरा, मैंगनीज, कोरंडम, डोलोमाइट और कोयला सहित 9 खनिजों के क्षेत्र में सक्रिय है। बस्तर अंचल में आदिवासी समुदाय के जीवनयापन को सशक्त बनाने के लिए टिन अयस्क की खरीदी विशेष रूप से की जा रही है। टिन को क्रिटिकल मिनरल की श्रेणी में रखते हुए इसके खनन और स्मेल्टर संचालन से स्थानीय रोजगार और आय में बड़ा इजाफा हुआ है। बीते दो वर्षों में टिन का क्रय मूल्य बढ़कर 1926 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जिससे आदिवासी हितग्राहियों को पहले से लगभग तीन गुना अधिक लाभ मिल रहा है।
खनिज संसाधन विभाग द्वारा पारदर्शी नीलामी प्रणाली को अपनाते हुए MSTC के माध्यम से तकनीक-सक्षम प्रक्रियाएं लागू की गई हैं। इससे लौह अयस्क की नीलामी में रिकॉर्ड मूल्य और न्यूनतम उत्खनन दर प्राप्त हुई है। आरीडोंगरी खदान से ही पिछले वर्ष राज्य को करोड़ों का राजस्व और CMDC को बड़ा शुद्ध लाभ मिला है, साथ ही सैकड़ों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।
क्रिटिकल मिनरल में आत्मनिर्भरता की दिशा में CMDC ने कोल इंडिया, NMDC और अन्य केंद्रीय उपक्रमों के साथ संयुक्त पहल शुरू की है। बैलाडिला क्षेत्र में लौह अयस्क उत्पादन, केर्वा कोल परियोजना की सफल नीलामी, महासमुंद में हीरा संभावनाओं की जांच और कॉपर अन्वेषण जैसी योजनाएं भविष्य की बड़ी उपलब्धियों का संकेत दे रही हैं।
आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नए खनिज क्षेत्रों की खोज, स्लैग से क्रिटिकल मिनरल निष्कर्षण, कौशल विकास और सेवा प्रदाता के रूप में CMDC की भूमिका को और मजबूत किया जाएगा। इन प्रयासों से न सिर्फ राज्य का राजस्व बढ़ेगा, बल्कि रोजगार, स्थानीय उद्योग और समावेशी विकास को भी नई दिशा मिलेगी।



