मनमानी पर उतारू सहकारिता विभाग के अधिकारी ! जिस कॉलोनी के Oic वहां न जाते हैं, न रहवासियों का मोबाइल उठाते हैं

कैपिटल होम सोसाइटी में नए ओआईसी पर उठे सवाल — बिना टेंडर के नियुक्तियां, सिकिंग फंड पहले ही खत्म, निर्वाचन के आदेश के दो महीने बाद भी नहीं कराए जा रहे चुनाव ।
राजधानी रायपुर की कैपिटल होम आवासीय समिति सरकारी तंत्र के मकड़जाल में उलझकर कर्जदार बन चुकी है । सोसाइटी प्रबंधन को लेकर निवासियों ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं । फिलहाल सोसाइटी की जिम्मेदारी उप पंजीयक कार्यालय रायपुर से ओआईसी अधिकारी सत्येंद्र देवांगन के पास है। देवांगन ने चार्ज संभालने के बाद एक आमसभा तो आयोजित की, लेकिन उसके बाद करीब छह महीने गुजर गए और वे कभी सोसाइटी में नजर नहीं आए ।
इससे पहले, करीब तीन साल तक सहकारिता विभाग के ओआईसी डीडी बिस्वास सोसाइटी के प्रभारी रहे। निवासियों का आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान सोसाइटी का सिकिंग फंड पूरी तरह खत्म हो गया, लेकिन इस पर किसी तरह की जांच या जवाबदेही तय नहीं की गई। न ही सोसाइटी का विधिवत ऑडिट कराया गया है ।
अब नए ओआईसी सत्येंद्र देवांगन पर भी पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सोसाइटी के लोगों का कहना है कि चार्ज संभालते ही उन्होंने बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के अपने परिचितों को वेंडर बना दिया, जिनके हवाले सिक्योरिटी गार्ड, सफाई व्यवस्था और सीसीटीवी सिस्टम जैसी तमाम सेवाएं कर दी गईं। जिसका खर्च करीब 6 लाख रुपए महीना बताया जा रहा है ।
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निवासियों का आरोप है कि सोसाइटी में न तो किसी निविदा की सूचना दी गई, न ही निवासियों से राय ली गई। इससे निवासियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। वे बिगत कई महीनों से सोसाइटी के रहवासियों का फोन भी नहीं उठाते हैं, न ही किसी से मिलते हैं ।
कई बार लिखित में मांगने पर भी वे पिछले कार्यकाल के दौरान हुई अनिमियतता पर भी जांच नहीं करा रहे हैं । जिससे रहवासियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है । वहीं फोर्थ आई न्यूज ने उनसे इस बारे में जानकारी उनके मोबाइल पर मांगनी चाही तो उन्होने मोबाइल रिसीव नहीं किया ।




