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रूसी तेल पर भारत को छूट देने से अमेरिका में बवाल, ट्रंप के फैसले पर विपक्ष का हमला

अमेरिका में भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए दी गई अस्थायी छूट को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा भारत को 30 दिनों तक रूसी तेल खरीदने की छूट देने के फैसले पर विपक्षी डेमोक्रेट नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है।

रिपोर्टों के अनुसार डेमोक्रेट सांसदों ने अमेरिकी ट्रेजरी सचिव को पत्र लिखकर इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यह कदम रूस जैसे देश को आर्थिक फायदा पहुंचा सकता है, जिसे अमेरिका का रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना जाता है।

विपक्ष का आरोप है कि रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर लगाए गए प्रतिबंधों का मकसद उसकी आर्थिक ताकत को सीमित करना था। लेकिन यदि भारत जैसे बड़े बाजार को तेल खरीदने की छूट दी जाती है तो इन प्रतिबंधों का असर कमजोर पड़ सकता है।

दूसरी ओर कई विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर लिया गया होगा। भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में से एक है और रूस उसके प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ तेल व्यापार का नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति का भी हिस्सा बन गया है। भारत, अमेरिका और रूस के बीच संबंधों का संतुलन इस विवाद में अहम भूमिका निभा सकता है।

इस फैसले ने अमेरिकी राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है कि क्या ऊर्जा सुरक्षा के नाम पर ऐसे फैसले लिए जाने चाहिए जो प्रतिबंधों की नीति को कमजोर कर सकते हैं।

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