म्यांमार में राष्ट्रपति चयन या सत्ता का नया मुखौटा क्या चुनाव सिर्फ दिखावा था

21 मार्च 2026 को म्यांमार से आई एक बड़ी खबर ने दक्षिण एशिया की राजनीति पर फिर बहस तेज कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक म्यांमार की संसद ने 30 मार्च से नए राष्ट्रपति के चयन की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की। यह कदम उस विवादित चुनाव के बाद आया जिसमें सेना समर्थित दल की जीत हुई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि सैन्य प्रतिष्ठान और संसद के दोनों सदन एक एक उम्मीदवार नामित करेंगे, जिसके बाद मतदान के जरिए एक व्यक्ति राष्ट्रपति बनेगा और बाकी दो उपराष्ट्रपति पद पर रहेंगे। हालांकि अंतिम मतदान की पूरी समयरेखा स्पष्ट नहीं की गई, लेकिन विश्लेषकों के हवाले से कहा गया कि मौजूदा जुंटा प्रमुख मिन आंग हलाइंग इस पद के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी जोड़ा गया कि संवैधानिक पात्रता के लिए उन्हें सेना प्रमुख का पद छोड़ना पड़ सकता है। लेकिन पर्यवेक्षकों ने इस प्रक्रिया को लोकतांत्रिक संक्रमण कम और सैन्य प्रभाव को नागरिक ढांचे में ढालने की कोशिश ज्यादा बताया। 2021 के तख्तापलट के बाद से म्यांमार लगातार संघर्ष, असंतोष और सशस्त्र प्रतिरोध की चपेट में है। निर्वाचित सरकार को हटाए जाने के बाद राजनीतिक वैधता का संकट बना हुआ है, और इस नए राष्ट्रपति चयन की घोषणा ने यही सवाल फिर तेज कर दिया है कि क्या देश वास्तव में लोकतंत्र की ओर लौट रहा है या बस सत्ता का चेहरा बदला जा रहा है।



