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शी जिनपिंग की पाकिस्तान यात्रा: CPEC 2.0 पर दांव, शक्सगाम विवाद पर भारत सख़्त

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित पाकिस्तान यात्रा दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रही है। आर्थिक बदहाली और बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह दौरा उम्मीदों का पैकेज माना जा रहा है, जबकि भारत इसे बेहद सतर्क निगाहों से देख रहा है। संकेत हैं कि इस यात्रा में चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के दूसरे चरण यानी CPEC 2.0 को रफ्तार देने के साथ-साथ विवादित शक्सगाम घाटी में ढांचागत विस्तार पर चर्चा हो सकती है।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ CPEC 2.0 को अर्थव्यवस्था का “नया अध्याय” बता रहे हैं। योजना के तहत कृषि, आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और खनन जैसे क्षेत्रों में चीनी तकनीक के जरिए उत्पादन बढ़ाने और करीब 1 बिलियन डॉलर के व्यापार अधिशेष का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या यह परियोजना वाकई पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलों का इलाज बन पाएगी?

भारत की आपत्ति पहले जैसी ही स्पष्ट है। CPEC का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है, जिसे भारत अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानता है। शक्सगाम घाटी में चीनी गतिविधियों को लेकर भारत ने कड़ा संदेश दिया है। विदेश मंत्रालय ने यथास्थिति बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध दोहराया है, वहीं सेना प्रमुख ने 1963 के समझौते को अवैध बताते हुए CPEC 2.0 के तहत किसी भी गतिविधि को खारिज किया है।

दूसरी ओर, पाकिस्तान की कूटनीतिक चुनौती भी कम नहीं। बीते एक दशक में देश में लगभग 90 चीनी नागरिकों की हत्या हो चुकी है, जिससे बीजिंग सुरक्षा गारंटी को लेकर असंतुष्ट है। इसके बावजूद पाकिस्तान एक साथ चीन से कर्ज़ और निवेश चाहता है, और समानांतर रूप से अमेरिका से रिश्ते सुधारने की कोशिश भी कर रहा है। ऐसे में सवाल उठता है—क्या पाकिस्तान संतुलन साध पाएगा या यह ‘डबल गेम’ उसके लिए नई मुश्किलें खड़ी करेगा?

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