छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों की वैज्ञानिक सोच और नवाचार की प्रतिभा अब राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना रही है। इंस्पायर-मानक अवार्ड योजना के तहत प्रदेश के करीब 40 चयनित विद्यार्थियों को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। वहीं, छत्तीसगढ़ से अब तक लगभग 80 हजार नवाचारी विचार सामने आने की जानकारी दी गई है।
शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि हर बच्चे में कोई न कोई मौलिक प्रतिभा होती है। जरूरत है उस प्रतिभा को पहचानने और उसे आगे बढ़ने का अवसर देने की। उन्होंने विद्यार्थियों को ड्रोन तकनीक, सौर ऊर्जा और रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोगी आविष्कारों के उदाहरण देते हुए नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित किया।
मंत्री ने विद्यार्थियों से पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के साथ अपने आविष्कारों को समाज के लिए उपयोगी बनाने की अपील की। उन्होंने चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके अभिभावकों और शिक्षकों के योगदान की सराहना की।
शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने कहा कि नवाचार का मतलब केवल नई चीज बनाना नहीं, बल्कि पुराने काम को बेहतर तरीके से करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रयोग करने, गलतियों से सीखने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सफलता किसी की भाषा या सामाजिक पृष्ठभूमि से नहीं, बल्कि उसकी क्षमता, मेहनत और सोच से तय होती है।
रायपुर के बीटीआई ग्राउंड परिसर स्थित एससीआरटी भवन में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से चयनित 40 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा, इंस्पायर-मानक प्रतियोगिता के तहत जापान जाकर सीखने का अवसर पाने वाले पांच प्रतिभागियों को भी सम्मान दिया गया। जापान से लौटे रमन दास मानिकपुरी, समीक्षा साहू, सुनयना और शैयाद अली ने अपने अनुभव साझा किए।
गौरतलब है कि इंस्पायर-मानक योजना केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के सहयोग से संचालित होती है। इसके तहत कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को मौलिक विचारों पर आधारित प्रोजेक्ट और मॉडल विकसित करने के लिए 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देना है।
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