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खैरागढ़ महोत्सव में कला, संगीत और परंपरा का अद्भुत संगम

खैरागढ़ की सांस्कृतिक जमीन शुक्रवार रात रंग, सुर और ताल से भर उठी। बहुप्रतीक्षित खैरागढ़ महोत्सव के समापन समारोह में राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

राज्यपाल ने कहा कि खैरागढ़ की सांस्कृतिक विरासत सिर्फ छत्तीसगढ़ की पहचान नहीं, बल्कि भारत की कला यात्रा का अहम केंद्र है। उन्होंने बताया कि यहां की सांस्कृतिक परंपरा रामायण काल जितनी प्राचीन मानी जाती है। साथ ही यह भी कहा कि संस्कृति को संरक्षित रखने में ग्रामीण समाज की बड़ी भूमिका होती है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में कला के प्रति रूचि जगाते हैं और कलाकारों को मंच प्रदान करते हैं।

समारोह में विशिष्ट अतिथि रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि खैरागढ़ अब भारत की कला-राजधानी के रूप में अपनी पहचान बना रहा है और जल्द ही यह उत्सव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल करेगा।

इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने कहा कि खैरागढ़ महोत्सव विद्यार्थियों की साधना, अनुसन्धान और कला अभ्यास का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही विश्वविद्यालय राष्ट्रीय कला केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

कार्यक्रम में नृत्य संकाय के विद्यार्थियों ने कथक, भरतनाट्यम और ओडिसी की मोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कोलकाता के मशहूर सरोदवादक उस्ताद सिराज अली खान और लंदन के तबला वादक पंडित संजू सहाय की जुगलबंदी ने माहौल को सुरों से सराबोर कर दिया।

पुणे की प्रख्यात कथक नृत्यांगना विदुषी शमा भाटे और उनके समूह ने रामायण के प्रसंगों पर शानदार कथक प्रस्तुति दी। वहीं राजनांदगांव की लोकगायिका कविता वासनिक और उनके दल ने छत्तीसगढ़ी लोकधुनों से समां बांध दिया।

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