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सरकारी विमान, वायरल वीडियो और वर्दी की मर्यादा—बागेश्वर बाबा की रायपुर एंट्री पर सियासी–प्रशासनिक तूफान

मध्यप्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र शास्त्री उर्फ बाबा बागेश्वर की रायपुर यात्रा अब आस्था से आगे बढ़कर सत्ता, व्यवस्था और नियमों की कसौटी बन गई है। सरकारी विमान से रायपुर आगमन, फिर भिलाई रवाना होने की तस्वीरों और वीडियो ने सोशल मीडिया पर ऐसा बवाल खड़ा किया कि मामला सीधे प्रशासन और राजनीति के दरवाजे तक जा पहुंचा।

सबसे पहले माना थाना प्रभारी मनीष तिवारी का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे टोपी और जूते उतारकर बाबा बागेश्वर के पैर छूते नजर आते हैं। वीडियो सामने आते ही बहस छिड़ गई—एक तरफ इसे निजी आस्था बताकर सही ठहराया जा रहा है, तो दूसरी तरफ पुलिस की गरिमा और सेवा नियमों का हवाला देकर कार्रवाई की मांग उठ रही है।
इस पर रायपुर SSP डॉ. लाल उमेद सिंह ने सफाई दी कि संबंधित पुलिसकर्मी पूरी वर्दी में नहीं था और उसने टोपी-जूते उतार रखे थे, इसलिए फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की गई है। लेकिन यह बयान भी बहस को शांत नहीं कर सका।

विवाद यहीं नहीं रुका। बाबा बागेश्वर को छत्तीसगढ़ सरकार के शासकीय विमान की सुविधा दिए जाने पर सवाल और गहरे हो गए। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं—जब धीरेंद्र शास्त्री किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं और कार्यक्रम निजी धार्मिक है, तो सरकारी विमान क्यों?
कांग्रेस ने इसे “जनता के पैसों की खुली बर्बादी” करार दिया, जबकि भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस हिंदू धर्म प्रचारकों को कभी बर्दाश्त नहीं कर पाती।

जानकारी के मुताबिक, एक मंत्री पहले उसी सरकारी विमान से सतना गए और वहीं से बाबा बागेश्वर को लेकर रायपुर पहुंचे। वायरल वीडियो में विमान से तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब उतरते भी नजर आ रहे हैं, जिससे सवाल और तीखे हो गए हैं।

दरअसल, भिलाई के जयंती स्टेडियम में हनुमंत कथा 25 दिसंबर से 29 दिसंबर तक चल रही है, जिसमें कथा वाचन के लिए बाबा बागेश्वर गुरुवार को रायपुर होते हुए भिलाई पहुंचे थे। लेकिन अब यह यात्रा कथा से ज्यादा सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग और वर्दी की मर्यादा पर केंद्रित बहस में बदल चुकी है।

एक तरफ आस्था और व्यक्तिगत विश्वास का तर्क है, तो दूसरी तरफ नियम, मर्यादा और जवाबदेही की मांग। सवाल साफ है—क्या आस्था के नाम पर सरकारी संसाधनों और वर्दी की सीमाएं लांघी जा सकती हैं?
वायरल वीडियो और सियासी बयानबाजी के बीच अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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