सड़क हादसों पर सख्ती: 108 एम्बुलेंस की समयबद्ध पहुंच, ब्लैक स्पॉट सुधार और हेलमेट-सीटबेल्ट पर जोर

रायपुर। राज्य के सड़क सुरक्षा परिदृश्य को मजबूत करने के लिए हुई समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव विकासशील ने स्पष्ट निर्देश दिए कि दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से काम करें। उन्होंने 108 एम्बुलेंस की समय पर घटनास्थल पर पहुंच सुनिश्चित करने और इसकी सतत मॉनिटरिंग पर जोर दिया। दुर्घटना में घायलों के त्वरित और बेहतर इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटरों को सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए।
जिलों में सड़क सुरक्षा की निरंतर निगरानी, जिला सड़क सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से यातायात प्रबंधन को सुगम बनाने की बात कही गई। बैठक में बताया गया कि चिन्हित 152 ब्लैक स्पॉट्स में से 102 पर सुधार कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि शेष 50 पर जल्द सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। नियम उल्लंघन पर पुलिस और परिवहन विभाग की कार्रवाई से करोड़ों की शमन राशि वसूल की गई है।
वर्ष 2025 में 150 सड़क सुरक्षा समिति बैठकों के आयोजन, अस्पतालों में 24×7 एक्स-रे, सीटी-स्कैन, लैब जांच, आपात दवाइयों की उपलब्धता और स्वास्थ्य स्टाफ के प्रशिक्षण की जानकारी दी गई। स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में व्यापक यातायात जागरूकता कार्यक्रमों से लाखों शिक्षक-छात्र लाभान्वित हुए हैं। नगरीय निकायों में लाखों एलईडी स्ट्रीट लाइट्स लगाई गई हैं, जबकि हजारों अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है।
हिट एंड रन मामलों में समयबद्ध दावा निपटान, गुड सेमेरिटन को सम्मान, मालवाहक वाहनों में यात्री परिवहन पर रोक और बिना हेलमेट/सीटबेल्ट व शराब पीकर वाहन चलाने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। विश्लेषण में सामने आया कि दोपहर 3 से रात 9 बजे के बीच, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्घटनाएं अधिक हो रही हैं, जिनमें बिना हेलमेट दोपहिया चलाना मौत का प्रमुख कारण है।
साथ ही, सड़क डिजाइन की गुणवत्ता, एनएचएआई/एनएच की त्वरित कार्रवाई, ब्लैक स्पॉट सुधार के बाद दुर्घटनाओं में कमी का विश्लेषण और सड़क सुरक्षा माह को प्रभावी बनाने पर बल दिया गया।




