छत्तीसगढ़ न्यूज़ | Fourth Eye News

बस्तर में बदलाव की नई इबारत: 63 माओवादियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, विकास की मुख्यधारा में लौटे

बस्तर अंचल में शांति, भरोसे और विकास की दिशा में एक बड़ा मोड़ सामने आया है। दंतेवाड़ा जिले में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के तहत 36 इनामी सहित कुल 63 माओवादियों ने हिंसा से तौबा कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की राह चुन ली है। इनमें 18 महिलाएं और 45 पुरुष शामिल हैं। यह कदम केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि बस्तर के भविष्य को नई दिशा देने वाला निर्णायक परिवर्तन माना जा रहा है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह सफलता केंद्र सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति और बहुआयामी सुरक्षा व विकास रणनीति का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थायी समाधान का रास्ता हथियार नहीं, बल्कि संवाद, विश्वास और विकास से होकर गुजरता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति, सटीक सुरक्षा व्यवस्था और सुशासन आधारित प्रशासन के कारण नक्सलवाद अब अंतिम दौर में है। माओवादी नेटवर्क कमजोर पड़ रहा है और बस्तर के दूरस्थ इलाकों तक सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को सम्मानजनक पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण, आजीविका के अवसर और सामाजिक पुनर्स्थापन की पूरी व्यवस्था दी जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से जुड़ सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब भय की पहचान से बाहर निकलकर भविष्य की भूमि बन रहा है, जहां शांति, सुशासन और विकास मिलकर एक उज्ज्वल कल की नींव रख रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button