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आंगनबाड़ी का कायाकल्प: हर दीवार बनी पाठशाला, हर कदम में सशक्त भारत की नींव

रायपुर। भारत का भविष्य जिन नन्हे कदमों से आगे बढ़ता है, वे आज देशभर के आंगनबाड़ी केंद्रों में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ आकार ले रहे हैं। जो केंद्र कभी केवल पोषण और देखभाल तक सीमित माने जाते थे, वे अब प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और ग्रामीण रोजगार के बहुआयामी केंद्र बन चुके हैं। छत्तीसगढ़ के महासमुंद, धमतरी, मुंगेली और नारायणपुर जिलों में दिख रहा यह बदलाव अब एक प्रेरक मॉडल के रूप में उभर रहा है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और महिला एवं बाल विकास विभाग के अभिशरण से तैयार नए आंगनबाड़ी भवनों ने Building as Learning Aid (BALA) की अवधारणा को जमीन पर उतार दिया है। 11.69 लाख रुपये की लागत से बने प्रत्येक भवन की दीवारें, फर्श, सीढ़ियाँ और खुले स्थान अब शिक्षण सामग्री बन चुके हैं। हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला, अंक, आकृतियाँ, दिशाएँ और स्थानीय परिवेश से जुड़ी चित्रकारी बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर दे रही है। सच मायनों में अब भवन स्वयं शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं।

धमतरी जिले में मनरेगा, ICDS और 15वें वित्त आयोग के सहयोग से 81 बाला आधारित आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण शुरू हुआ, जिनमें से 51 पूरे हो चुके हैं। ग्राम उड़ेंना का केंद्र इसका सशक्त उदाहरण है, जहाँ विशेष पिछड़ी जनजाति कमार वर्ग के बच्चे दृश्य-आधारित शिक्षण से सहज रूप से ज्ञान अर्जित कर रहे हैं। दीवारों पर भाषा चार्ट, गणितीय अवधारणाएँ और स्थानीय संस्कृति की झलक बच्चों में जिज्ञासा और सीखने की रुचि बढ़ा रही है।

इन भवनों का निर्माण मनरेगा के तहत होने से ग्रामीणों को रोजगार मिला है, परिवारों की आय बढ़ी है और पलायन पर नियंत्रण संभव हुआ है। इस प्रकार आंगनबाड़ी निर्माण बाल विकास के साथ ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण का भी मजबूत मॉडल बन गया है।

महासमुंद के शहरी केंद्रों से लेकर नारायणपुर के वनांचल ग्राम कुंदला तक, आंगनबाड़ी केंद्र अब आधुनिक प्ले-स्कूल जैसा माहौल दे रहे हैं। रंग-बिरंगी दीवारें, शैक्षणिक चार्ट और खेल सामग्री बच्चों के चेहरे पर मुस्कान ला रही हैं।

अब ये केंद्र केवल बच्चों तक सीमित नहीं रहे। गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरी बालिकाओं के लिए पोषण, टीकाकरण और स्वास्थ्य परामर्श का प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। “लड़का-लड़की एक समान” जैसे संदेश सामाजिक बदलाव की दिशा भी तय कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, नोनी सुरक्षा योजना और महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन भी इन्हीं केंद्रों के माध्यम से हो रहा है।

स्वच्छ रसोई, आरओ जल व्यवस्था, खेलघर और सामुदायिक सहभागिता ने इन केंद्रों को सुरक्षित और बाल-अनुकूल बनाया है। महतारी समितियों की सक्रिय भागीदारी से बच्चों की उपस्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

आज आंगनबाड़ी केंद्र सचमुच “बच्चों की पहली पाठशाला” बन चुके हैं, जहाँ शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और रोजगार मिलकर सशक्त और समावेशी भारत की मजबूत नींव रख रहे हैं।

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