Self-help group changed her fortune, Amravatipur's Manbaso became 'Lakhpati Didi'

स्व-सहायता समूह से बदली किस्मत, अमरावतीपुर की मनबासों बनीं ‘लखपति दीदी’

रायपुर। प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने वाली योजनाएं अब जमीन पर असर दिखा रही हैं। सरकारी सहयोग और स्व-सहायता समूह मॉडल ने कई महिलाओं की जिंदगी की दिशा बदल दी है। बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड के ग्राम पंचायत अमरावतीपुर की मनबासों इसका जीवंत उदाहरण हैं, जिन्होंने संघर्ष से सफलता तक का सफर तय कर ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बनाई है।

कभी सीमित आय में परिवार का पालन-पोषण करना उनके लिए बड़ी चुनौती था। आर्थिक तंगी के बीच उन्होंने उन्नति महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया, जो उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। समूह के जरिए उन्हें सामुदायिक निवेश निधि से 60 हजार रुपये और बैंक से 3 लाख रुपये का ऋण मिला।

इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने गांव में किराना और पूजा सामग्री की दुकान शुरू की। मेहनत, अनुशासन और समझदारी से व्यवसाय चलाते हुए उन्होंने अपने उद्यम को मजबूत किया। आज वे सालाना करीब 3 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। जहां पहले आय हजारों में सिमटी थी, अब स्थायी आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।

अपनी कमाई से उन्होंने बच्चों की उच्च शिक्षा सुनिश्चित की और परिवार की जरूरतों को पूरा किया। मनबासों अब गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका मानना है कि शासन की योजनाओं और वित्तीय सहयोग का सही उपयोग कर महिलाएं मजदूरी से आगे बढ़कर स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

महिला स्व-सहायता समूह मॉडल न केवल आर्थिक मजबूती दे रहा है, बल्कि ग्रामीण समाज में सकारात्मक बदलाव की नई कहानी भी लिख रहा है।

4rtheye web Desk
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