17 फरवरी 2026 का “रिंग ऑफ फायर” सूर्य ग्रहण: वैज्ञानिक और धार्मिक मतभेद

17 फरवरी 2026 को एक वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) का दुर्लभ खगोलीय प्राकट्य हुआ, जिसे “रिंग ऑफ फायर” के नाम से भी जाना जाता है। इस घटना में चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है, परंतु उसकी दूरी कम होने के कारण वह सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता, जिससे बाहरी सूर्यमंडल एक चमकीली परिधि के रूप में दिखाई देता है। ग्रहण का आनंद मुख्य रूप से अंटार्कटिका के ऊपर देखा गया, जबकि आंशिक प्रभाव दक्षिणी अमेरिका तथा अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी महसूस किया गया।
वैज्ञानिकों ने इस खगोलीय घटना को सूर्य–चंद्रमा–पृथ्वी के ज्यामितीय संरेखन का परिणाम बताया है, जो हर कुछ वर्षों में होता है। यह ग्रहण संभवतः 6.8 दिनों के बाद चंद्रमा के एपोजी से और 7.5 दिनों पहले पेरिजी से संबंधित था, जिससे चंद्रमा की दिखाई देने वाली परिधि अपेक्षाकृत छोटी दिखी।
हालाँकि, इस खगोलीय परिवर्तन पर धार्मिक और लोकप्रिय मान्यताओं में मतभेद उत्पन्न हो गये हैं। कुछ धार्मिक समुदायों ने इसे अशुभ समय का संकेत माना और ग्रहण के दौरान पूजा और आस्था संबंधी चेतावनियां जारी की हैं। दूसरी ओर वैज्ञानिक समुदाय ने लोगों से उचित सुरक्षा उपाय अपनाने और बिना सुरक्षा चश्मे के सूर्य की ओर देखने से बचने की सलाह दी है।
खगोलविदों का कहना है कि यह ग्रहण उन क्षेत्रों में वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है जहाँ यह दिखाई दिया, विशेष रूप से अंटार्कटिका में अध्ययन केंद्रों से ग्रहण के दौरान सौर वायुमंडलीय परतों पर डेटा इकट्ठा किया गया।



