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जंगल तक पहुंची टीम, समझाइश से हाई-रिस्क गर्भवती का सुरक्षित प्रसव — मां और नवजात दोनों स्वस्थ

रायपुर। कोरिया जिले के दूरस्थ वनांचल में स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की मुहिम रंग लाई है। सोनहत विकासखंड के अकलासरई गांव में गंभीर एनीमिया से जूझ रही एक हाई-रिस्क गर्भवती महिला को काउंसलिंग के जरिए संस्थागत प्रसव के लिए तैयार किया गया, जिससे मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं।

24 वर्षीय आरती, जो विशेष पिछड़ी पंडो जनजाति से हैं, पहली गर्भावस्था के दौरान गंभीर एनीमिया से पीड़ित थीं। उनका हीमोग्लोबिन 7 ग्राम प्रति डेसीलीटर से भी कम था और वे सिकलिंग पॉजिटिव भी पाई गईं। आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा उन्हें नियमित रूप से “कोरिया मोदक” लड्डू दिए गए, जिससे स्वास्थ्य में सुधार हुआ और प्रसव के समय हीमोग्लोबिन 8.3 ग्राम प्रति डेसीलीटर तक पहुंच गया।

गंभीर स्थिति के कारण उन्हें जिला अस्पताल बैकुंठपुर रेफर किया गया था, लेकिन डर और जागरूकता की कमी के चलते वे परिवार सहित वापस गांव लौट आईं। सूचना मिलने पर जिला प्रशासन की पहल पर राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम गांव पहुंची।

टीम के आने की खबर से घबराकर महिला और परिजन अस्पताल जाने से बचने के लिए जंगल की ओर निकल गए। इसके बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों, मितानिनों और ग्रामीणों की मदद से टीम ने धैर्यपूर्वक समझाइश दी और भरोसा दिलाया कि पूरा प्रशासन उनके साथ है। लगातार काउंसलिंग के बाद परिवार सुरक्षित प्रसव के लिए राजी हो गया।

आखिरकार 12 मार्च को भैंसवार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा टीम की निगरानी में सफल संस्थागत प्रसव कराया गया। नवजात का वजन 3.5 किलोग्राम है और मां-बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। पोषण पहल “कोरिया मोदक” और प्रशासन की संवेदनशील पहल से स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अब दूरस्थ वन क्षेत्रों तक पहुंच रहा है।

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