तेहरान पर फिर हमले क्या दुनिया खुली जंग के मुहाने पर खड़ी है

21 मार्च 2026 को पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा गया जब रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल ने तेहरान में ईरानी सैन्य ढांचे पर नए हमले किए और उसी दिन बेरूत में हिज्बुल्लाह से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि यह कार्रवाई उस व्यापक संघर्ष का हिस्सा है जिसमें ईरान की ओर से पहले इजरायल पर मिसाइल हमले हुए थे और जवाबी सैन्य अभियान लगातार तेज हो रहा है। इस घटनाक्रम ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों पर नई चिंता पैदा कर दी। रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे देशों ने ईरानी ड्रोन और मिसाइल खतरों को इंटरसेप्ट करने की बात कही, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये जहाजरानी पर भी गंभीर दबाव बना। इसी पृष्ठभूमि में एक दूसरी रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के दो ध्वजधारी एलपीजी टैंकर कुछ रुकावट के बाद फिर होर्मुज से गुजरने की तैयारी कर रहे थे, जबकि कई जहाज एहतियात में रुके हुए थे। इससे साफ दिखा कि यह युद्ध सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, शिपिंग और एशियाई अर्थव्यवस्थाओं तक असर डाल रहा है। रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की भूमिका, युद्ध के लक्ष्य और आगे की रणनीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असमंजस बना हुआ है। इस पूरे संकट ने यह सवाल फिर उछाल दिया है कि क्या क्षेत्रीय संघर्ष अब पूरी दुनिया की आर्थिक नसों पर सीधा प्रहार बन चुका है।




