ड्रग रैकेट में फंसे पुलिसकर्मी, हिमाचल विधानसभा में सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

21 मार्च 2026 को हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र उस समय गर्मा गया जब कुल्लू में बहुचर्चित एलएसडी ड्रग रैकेट में स्पेशल टास्क फोर्स के चार पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से उठा। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने शून्यकाल में इस मामले को उठाते हुए कहा कि हिमाचल तेजी से नशे की चपेट में जा रहा है, खासकर सिंथेटिक ड्रग्स के कारण। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए आरोप लगाया कि जिन पुलिसकर्मियों पर नशा तस्करी रोकने की जिम्मेदारी थी, वही कथित रूप से इसमें मददगार बन गए।
रिपोर्ट के अनुसार, जयराम ठाकुर ने कहा कि गिरफ्तार एसटीएफ कर्मियों ने लगभग 3 करोड़ रुपये कीमत की एलएसडी बरामद की, लेकिन तस्करों को बच निकलने दिया। उन्होंने सरकार पर पुलिस का राजनीतिक इस्तेमाल करने और नशा तस्करों की बजाय उपभोक्ताओं पर ज्यादा फोकस करने का आरोप लगाया। भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने भी कहा कि एंटी ड्रग एसटीएफ में केवल बेदाग छवि वाले अधिकारियों की तैनाती होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि नशे से जुड़े मामलों में 11 पुलिसकर्मियों और आठ अन्य सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा चुका है। सुक्खू ने यह भी कहा कि चारों आरोपियों की गिरफ्तारी शिमला पुलिस ने की और पूरे पुलिस बल को एक नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके जवाब के बाद सदन में नारेबाजी हुई और कुछ विपक्षी सदस्य वॉकआउट तक कर गए। उसी दिन सरकार ने पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर अनाथ और विधवा कल्याण के लिए उपकर से जुड़ा संशोधन विधेयक भी पेश किया।21 मार्च 2026 को हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र उस समय गर्मा गया जब कुल्लू में बहुचर्चित एलएसडी ड्रग रैकेट में स्पेशल टास्क फोर्स के चार पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से उठा। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने शून्यकाल में इस मामले को उठाते हुए कहा कि हिमाचल तेजी से नशे की चपेट में जा रहा है, खासकर सिंथेटिक ड्रग्स के कारण। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए आरोप लगाया कि जिन पुलिसकर्मियों पर नशा तस्करी रोकने की जिम्मेदारी थी, वही कथित रूप से इसमें मददगार बन गए।
रिपोर्ट के अनुसार, जयराम ठाकुर ने कहा कि गिरफ्तार एसटीएफ कर्मियों ने लगभग 3 करोड़ रुपये कीमत की एलएसडी बरामद की, लेकिन तस्करों को बच निकलने दिया। उन्होंने सरकार पर पुलिस का राजनीतिक इस्तेमाल करने और नशा तस्करों की बजाय उपभोक्ताओं पर ज्यादा फोकस करने का आरोप लगाया। भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने भी कहा कि एंटी ड्रग एसटीएफ में केवल बेदाग छवि वाले अधिकारियों की तैनाती होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि नशे से जुड़े मामलों में 11 पुलिसकर्मियों और आठ अन्य सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा चुका है। सुक्खू ने यह भी कहा कि चारों आरोपियों की गिरफ्तारी शिमला पुलिस ने की और पूरे पुलिस बल को एक नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके जवाब के बाद सदन में नारेबाजी हुई और कुछ विपक्षी सदस्य वॉकआउट तक कर गए। उसी दिन सरकार ने पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर अनाथ और विधवा कल्याण के लिए उपकर से जुड़ा संशोधन विधेयक भी पेश किया।




